52 की उम्र में पास की NEET की परीक्षा

52 की उम्र में पास की NEET की परीक्षा, ताकि गरीब बच्चों को मुफ्त में दे सके शिक्षा

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मोहित नागर
मोहित नागर
मोहित नागर एक कंटेंट राइटर है जो देश- विदेश, पॉलिटिक्स, एंटरटेनमेंट, हेल्थ और वास्तु से जुड़ी खबरों पर लिखना पसंद करते हैं। उन्होंने डॉ० भीमराव अम्बेडकर कॉलेज (दिल्ली यूनिवर्सिटी) से अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। मोहित को लगभग 3 वर्ष का समाचार वेब पोर्टल एवं पब्लिक रिलेशन संस्थाओं के साथ काम करने का अनुभव है।

देश में एक से बढ़कर एक बड़े लोग हैं, जिन्होंने कई बड़े मुकाम हासिल किए हैं और उनके नाम से भी हर कोई वाकिफ है। आप अगर अपने आस पास नज़रें घुमाकर देखें तो कई लोग ऐसे हैं, जिन्होंने कड़ी मेहनत करके अपने सपनों को पूरा किया है, लेकिन उन्हें कोई नहीं जानता। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है, अहमदाबाद के बोडकदेव इलाके में रहने वाले प्रदीप कुमार सिंह ने। अक्सर जिस उम्र में लोग आराम करने के बारे में सोचते हैं, उस उम्र में उन्होंने NEET की परीक्षा पास कर ली है। उनके अंदर पढ़ाई का ऐसा जुनून है कि करीब तीन दशक पहले पढ़ाई छोड़ने के बावजूद 52 वर्षीय प्रदीप कुमार सिंह ने NEET की परीक्षा में 720 में से 607 अंक हासिल किए।

लेकिन इस परिक्षा को पास करने के बाद उन्होंने कभी डॉक्टर बनने के बारे में या मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेने के बारे में कभी नहीं सोचा, उनकी सोच बहुत ही अलग रही है। दरअसल वो गरीब व असहाय बच्चों को मुफ्त में कोचिंग देकर उन्हें डॉक्टर बनाना चाहते हैं। इन्होंने सोचा है कि वो गरीब छात्रों को मुफ्त कोचिंग देना चाहते हैं ताकि वे बच्चे NEET पास कर डॉक्टर बन सकें।

उनका कहना है कि “इस उम्र में मैंने 98.98 प्रतिशत नंबर हासिल किए, लेकिन इसके पीछे मेरा इरादा मेडिकल कॉलेज में दाखिल लेकर खुद डॉक्टर बनने का नहीं है। मैं गरीब छात्रों के लिए एक मुफ्त NEET कोचिंग सेंटर शुरू करना चाहता हूँ।”

उन्होंने बताया कि, उनका बेटा स्नेहांश भी थर्ड ईयर एमबीबीएस का छात्र है। वह उनके इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए उनका समर्थन कर रहा है। प्रदीप ने बताया कि, स्नेहांश बायो में काफी अच्छा है और उसी इस विषय में काफी दिलचस्पी है और मेरी फिजिक्स और केमिस्ट्री अच्छी है। ऐसे में हमने मुफ्त में कोचिंग देने का निर्णय लिया है। प्रदीप बचपन से पढ़ने में काफी होशियार रहे हैं। साल 1987 में उन्होंने 12वीं कक्षा में 71 फीसदी अंक प्राप्त किए थे। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला लिया था।

उनकी इस सोच ने जानें कितने छात्रों के पंखों में उड़ान भर दी है। जिन्होंने कभी बड़े-बड़े सपने देखे होंगे, लेकिन कुछ परेशानियों की वजह से उनके सपने पूरे होने से रुक गए होंगे, अब प्रदीप की इस सोच की वजह से उन बच्चों के भी सपने पूरे होंगे।

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