Brahmastra Review

Brahmastra Review: शानदार VFX के लिए देख सकते हैं फिल्म, ब्रह्मास्त्र से पहले फिल्म का नाम था ड्रैगन

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मोहित नागर
मोहित नागर
मोहित नागर एक कंटेंट राइटर है जो देश- विदेश, पॉलिटिक्स, एंटरटेनमेंट, हेल्थ और वास्तु से जुड़ी खबरों पर लिखना पसंद करते हैं। उन्होंने डॉ० भीमराव अम्बेडकर कॉलेज (दिल्ली यूनिवर्सिटी) से अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। मोहित को लगभग 3 वर्ष का समाचार वेब पोर्टल एवं पब्लिक रिलेशन संस्थाओं के साथ काम करने का अनुभव है।

फिल्म- ब्रह्मास्त्र- पार्ट वन शिवा
कास्ट- रणबीर कपूर , अमिताभ बच्चन, आलिया भट्ट, नागार्जुन, मौनी रॉय और शाहरुख खान
लेखक- अयान मुखर्जी और हुसैन दलाल
निर्देशक- अयान मुखर्जी
निर्माता- स्टार स्टूडियोज , धर्मा प्रोडक्शंस , प्राइम फोकस और स्टारलाइट पिक्चर्स
रिलीज डेट- 9 सितंबर 2022

डायरेक्टर अयान मुखर्जी और रणबीर कपूर की मचअवेटेड फिल्म ब्रह्मास्त्र आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। ब्रह्मास्त्र को मिले-जुले रिव्यू मिल रहे हैं। फिल्म का निर्देशन अयान मुखर्जी ने किया है। आपको बता दें कि फिल्म को बनने में 9 साल का समय लगा है। लंबे इंतजार के बाद फिल्म लोगों तक पहुंच ही गई। रणबीर कपूर ने फिल्म में शिवा नामक किरदार निभाया है, जो अग्नि अस्त्र है। जिसे अपनी इस सच्चाई के बारे में नहीं पता है। जब शिवा अपनी जिंदगी के सच को जानने के लिए निकलता है तो उसका ये सफर काफी मुश्किलों भरा होता है।

फिल्म ‘ब्रह्मास्त्र’ को तीन हिस्सों में बनाने की प्लानिंग पहले से ही की गई है। इस कहानी का पहला पार्ट को ‘ब्रह्मास्त्र: पार्ट वन शिवा’ के रूप में बनाया गया है। इस फिल्म के क्लाइमेक्स में अगले पार्ट ‘ब्रह्मास्त्र: पार्ट टू देवा’ की घोषणा भी की गई है।

अगर आपको फैंटसी कॉमिक्स वाले नावल पढना और हॉलीवुड की साइंस फिक्शन फिल्में देखना पसंद हैं, तो ये ‘ब्रह्मास्त्र’ आपको पसंद आ सकती है। वहीं ऐसे लोगों को ये फिल्म पसंद नहीं आएगी, जिन्हें कॉमडी और सीटीमार मनोरंजन पसंद है।

क्या है फिल्म की कहानी

फिल्म की कहानी प्राचीन भारत से शुरु होकर आज के भारत में आ जाती है। ये कहानी प्राचीन भारत में देवता असुर और शिव के रहस्य से शुरू होती है। फिर आज के भारत में कहानी सेट होती है, जहां रणबीर कपूर एक डीजे है। जिसका नाम है शिवा। शिवा की मुलाकात दशहरे के मेले में इशा नामक एक लड़की से होती है। शिवा को उससे पहली नजर वाला प्यार हो जाता है। इसके साथ ही शिवा को एक सुपर नैचरल ब्रह्म अनुभव होता है। जिसका उनके बचपन के सपनों से गहरा गहरा संबंध है। शिवा की कहानी को आगे जाकर एक वैज्ञानिक मोहन यानी शाहरुख खान और बनारस के पेंटर शेट्टी यानी नागार्जुन के साथ जोड़ दिया जाता है। इस सबके बाद कुछ असुरों को दिखाया जाता है। इन सबका नेतृत्व एक यक्षिणी जुनून यानी मौनी रॉय कर रही है। जुनून एक-एक करके मोहन और शेट्टी को मार डालती है। सारा खेल ब्रह्मास्त्र को पाने का है जिसकी रक्षा तीन लोग कर रहे है।

फिल्म 400 करोड़ में बनी है

ब्रह्मास्त्र का बजट 400 करोड़ रुपए है। फिल्म को बनाने में एक लम्बा समय लगा है। निर्देशक अयान मुखर्जी ने इस फिल्म पर बड़ी मेहनत की है। फिल्म में स्पेशल इफेक्ट्स काफी अच्छे हैं। अगर इन पर थोडा और काम किया जाता तो ये हॉलीवुड फिल्मों को भी टक्कर दे सकती है। फिल्म की फोटोग्राफी काफी अच्छी है। फिल्म में बनारस और हिमाचल की खूबसूरती से फिल्माया गया है। फिल्म 3D में है। इसलिये आपको एक्शन सीन्स चश्मा लगाकर या आईमैक्स के बड़े पर्दे पर अच्छे लगेंगे।

फिल्म शाहरुख खान के प्रशंसकों के भी दिल को छू जाती है। ब्रह्मास्त्र के पहले हॉफ में उनके सीक्वेंस दर्शकों को बांधकर रखते है। वानरास्त्र से नंदीअस्त्र तक आने की यात्रा रोमांच से भरपूर है। ‘ब्रह्मास्त्र: पार्ट वन शिवा’ आश्रम वाले सीन से धीमी पड़ने लगती है।

एक्टिंग

रणबीर कपूर ठीक लगे है। आलिया भट्ट भी अच्छी लगी हैं। अमिताभ बच्चन ने सबसे ज्यादा इम्प्रेस किया है। नागार्जुन अच्छे लगे हैं। मौनी रॉय ने विलेन का काम अच्छे से किया है। लेकिन उनकी जगह किसी और को कास्ट किया जाना चाहिए था।

फिल्म का फर्स्ट हाफ ठीक है लेकिन सेकेंड हाफ को लम्बा किया गया है। फिल्म और छोटी हो सकती थी। अगर ऐसा होता तो फिल्म और बेहतर लगती।

फिल्म ग्रैंड होने के बावजूद आपको पूरी तरह से बांध नहीं पाती है। फिल्म में कुछ नया करने की कोशिश के लिए अयान मुखर्जी की तारीफ होनी चाहिए। आप रणबीर आलिया और अमिताभ के फैन हैं तो फिल्म देख सकते हैं।

निर्देशक का काम कैसा है

अयान मुखर्जी ने एक निर्देशक के तौर पर अपना अच्छे से किया है। उन्होंने ऐसी फिल्म बनाने की कोशिश की है, जिसे हिंदी सिनेमा के जाने माने फिल्म मेकर बनाने की हिम्मत भी नहीं करते हैं। फंतासी सिनेमा का संदर्भ उन्होंने अंग्रेजी फिल्मों से लिया है। फिल्म में उनकी कोशिशों, कहानी में उनका विश्वास और फिल्म को परदे तक पहुंचाने का उनका हौसला काबिले तारीफ है।

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