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सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया अपना फैसला, कहा, ‘पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं हो सकता’

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सुप्रीम कोर्ट द्वारा आज एक बड़ा फैसला लिया गया है जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना वायरस (कोविड-19) महामारी के बीच वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए काली पूजा, दिवाली और इस साल कुछ और त्योहारों के दौरान पटाखों पर प्रतिबंध लगाने वाले कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द कर दिया है।

इस पर फैसला सुनाने वाले जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस अजय रस्तोगी की सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि ‘पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध’ नहीं हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट की विशेष पीठ ने पश्चिम बंगाल सरकार को यह सुनिश्चित करने की संभावनाएं भी तलाशने के लिए कहा है कि प्रतिबंधित पटाखों और उससे संबंधित सामान का राज्य में प्रवेश केंद्र पर ही आयात नहीं हो।

बता दें कि, सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले अपने जुलाई और अक्टूबर के दो आदेशों में ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति दी थी।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट की विशेष पीठ दिवाली के अवकाश के दौरान इस मामले पर सुनवाई के लिए बैठी थी। वह कलकत्ता उच्च न्यायालय के 29 अक्टूबर के उस फैसले के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी जिसमें उसने राज्य में सभी तरह के पटाखों की बिक्री, इस्तेमाल और खरीद पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था।

बता दें कि, कलकत्ता उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि, ‘‘राज्य यह सुनिश्चित करें कि इस साल काली पूजा, दिवाली के साथ-साथ छठ पूजा, जगद्धात्री पूजा, गुरू नानक जयंती और क्रिसमस और नववर्ष की पूर्व संध्या के दौरान किसी भी तरह के पटाखे नहीं जलाए जाए या उनका इस्तेमाल नहीं किया जाए।’’ कलकत्ता उच्च न्यायालय ने कहा था कि इन अवसरों पर केवल मोम या तेल के दीयों का ही इस्मेमाल किया जाए।

बार और बेंच नामक एक वेबसाइट की माने तो, सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि, “यह कोई नया मुद्दा नहीं है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही आदेश दे चुका है। इसे समान रूप से लागू करना होगा।”

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