इंजीनियरिंग छोड़कर टेबल टेनिस को चुना अपनी करियर, अब तक Commonwealth में ही जीत चुके हैं 13 पदक, आइए जानें इनके बारे में

इंजीनियरिंग छोड़कर टेबल टेनिस को चुना अपनी करियर, अब तक Commonwealth में ही जीत चुके हैं 13 पदक, आइए जानें इनके बारे में

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मोहित नागर
मोहित नागर
मोहित नागर एक कंटेंट राइटर है जो देश- विदेश, पॉलिटिक्स, एंटरटेनमेंट, हेल्थ और वास्तु से जुड़ी खबरों पर लिखना पसंद करते हैं। उन्होंने डॉ० भीमराव अम्बेडकर कॉलेज (दिल्ली यूनिवर्सिटी) से अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। मोहित को लगभग 3 वर्ष का समाचार वेब पोर्टल एवं पब्लिक रिलेशन संस्थाओं के साथ काम करने का अनुभव है।

चार कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड, दो एशियन गेम्स के मेडल्स, तीन ओलंपिक खेलों में हिस्सा लेने के साथ साथ दो आईटीटीएफ प्रो टूर खिताबों के साथ शरत कमल ने भारत के इतिहास में एक अलग जगह बनाई है। 40 साल के टेबल टेनिस प्लेयर शरत कमल (Sharath Kamal) ने एक के बाद एक कई रिकॉर्ड अरपने नाम किए हैं।

उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 (Commonwealth Games) में अपना 7वां स्वर्ण पदक जीता। CWG के इतिहास में उन्होंने वो 7 स्वर्ण पदक अपने नाम कर चुके हैं। शरत, 2 पुरुष सिंगल्स गोल्ड, 3 पुरुष टीम गोल्ड, 1 पुरुष डबल्स गोल्ड और 1 मिक्स्ड डबल्स गोल्ड जीत चुके हैं।

अनुभवी टेबल टेनिस खिलाड़ी अचंत शरत ने पुरुषों की एकल स्पर्धा के फाइनल में इंग्लैंड के 29 वर्षीय लियाम पिचफोर्ड को 4-1 से हरा कर शानदार जीत अपने नाम की है। हालांकि, पहले गेम में उन्हें 13-11 से हार का सामना करना पड़ा लेकिन उसके बाद, मानो उनकी शटल रुकना ही भूल गई हो। एक मैच हारने के बाद शरत कमल ने पिचफोर्ड को 11-7, 11-2, 11-6, 11-8 से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। उनका कॉमनवेल्थ गेम्स में यह 13वां पदक है।

कहते हैं, कि हमारे अंदर कई चीजें जेनेटिक होती हैं,इसी की एक पहचान शरत कमल हैं। अचंत शरत कमल का जन्म 12 जुलाई 1982 को चेन्नई, तमिलनाडु में हुआ था। जन्म के साथ ही उनके खून में टेबल टेनिस बसा हुआ था। शरत के पिता श्रीनिवास राव और चाचा मुरलीधर राव ने अपने शुरुआती दिनों में टेबल टेनिस खेला था और फिर उन्होंने कोचिंग शुरू कर दी।

शरत कमल ने चार साल की उम्र में टेनिस खेलना शुरू कर दिया था। पढ़ाई में भी वो काफी अच्छे थे। 15 साल की उम्र में उनके सामने एक सवाल खड़ा हुआ जिसमें उन्हें पढ़ाई कर के इंजीनियर बनो या खेल में आगे बढ़ो, इस बीच उन्होंने सब छोड़कर टेबल टेनिस को चुना और अब इसे अपने करियर के सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक मानते हैं।

उनके पिता और चाचा ने उन्हें कोचिंग देना शुरू किया, इस दौरान उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी, शरत कमल ने 2003 में अपना पहला राष्ट्रीय खिताब जीता। इसके अलावा 2004 कॉमनवेल्थ टेबल टेनिस चैंपियनशिप में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय पदक अपने नाम किया। उसके बाद उनके कदमों ने रुकने का नाम नहीं लिया और आज वो Commonwealth Games में ही 13 पदक जीत चुके हैं।

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