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शनिवार, जनवरी 28, 2023

यदि घर में हो वास्तुदोष तो आपके परिवार को घेर सकती है ये बिमारियां, वक्त रहते करवाएं इसका उपाय!

वास्तु दोष व्यक्ति के जीवन में बुरा प्रभाव डालते हैं, घर में शांति का भंग होना, कलेश रहना आदि कुछ संकेत हैं, जो घर में वास्तु दोष होने का इशारा देते हैं। वास्तु दोष से कई तरह के रोग या शोक उत्पन्न होते हैं। कई लोग सेहतमंद जीवन जीने के लिए तरह-तरह की कोशिश करते हैं। परंतु उसके बाद भी कई बार ऐसा होता है कि कोई न कोई रोग आपको या आपके परिवार के किसी सदस्य को घेरे ही रहता है और समस्या का हल नहीं समझ में आता। इस तरह के रोगों का कारण आपके घर के वास्तु से होता है। घर में वास्तुदोष होने से वहां रहने वाले लोग बीमार पड़ सकते हैं। वास्तु के कुछ नियमों का ठीक ढंग से पालन किया जाए तो भवन में रहने वाले सभी लोग शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ्य रह सकते हैं।

अनिद्रा रोग
वास्तुशास्त्र में पूर्व तथा उत्तर दिशा का हल्का और नीचा होना तथा दक्षिण व पश्चिम दिशा का भारी व ऊंचा होना अच्छा माना गया है। यदि पूर्व दिशा में भारी निर्माण हो तथा पश्चिम दिशा एकदम खाली व निर्माण रहित हो तो अनिद्रा का शिकार होना पड़ सकता है। उत्तर दिशा में भारी निर्माण हो परन्तु दक्षिण और पश्चिम दिशा निर्माण रहित हो तो भी ऐसी स्थिति उत्त्पन्न होती है।

चक्कर, बेचैनी और सिरदर्द
गृहस्वामी अग्निकोण या वायव्य कोण में शयन करें या उत्तर में सिर व दक्षिण में पैर करके सोए तब भी अनिद्रा या बेचैनी, सिरदर्द और चक्कर जैसी परेशानी हो सकती है, जिसके कारण दिन भर थकान की समस्या हो सकती है। धन आगमन और स्वास्थ्य की दृष्टि से दक्षिण या पूर्व की ओर पैर करना अच्छा माना गया है।

हार्ट अटैक, लकवा, हड्डी और स्नायु रोग
दक्षिण-पश्चिम दिशा में प्रवेश द्वार या हल्की चाहरदीवारी अथवा खाली जगह होना शुभ नहीं है। ऐसा होने से हार्ट अटैक, लकवा हड्डी एवं स्नायु  रोग संभव हैं। अतः यहां प्रवेश द्वार या खाली जगह छोड़ने से बचना चाहिए।

गृहणी के रोगी
रसोई घर में भोजन बनाते समय यदि गृहणी का मुख दक्षिण दिशा की ओर है तो त्वचा एवं हड्डी के रोग हो सकते हैं। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके भोजन पकाने से पैरों में दर्द की संभावना भी बनती है। इसी तरह पश्चिम की ओर मुख करके खाना पकने से आँख, नाक, कान एवं गले की समस्याएं हो सकती हैं। पूर्व दिशा की ओर चेहरा करके रसोई में भोजन बनाना स्वास्थ्य के लिए श्रेष्ठ माना गया है।

वायु रोग,रक्त विकार
दीवारों पर रंग-रोगन भी ध्यान से करवाना चाहिए। काला या गहरा नीला रंग वायु रोग,पेट में गैस, हाथ-पैरों में दर्द,नारंगी या पीला रंग ब्लड प्रेशर, गहरा लाल रंग रक्त विकार या दुर्घटना का कारण बन सकता है। अच्छे स्वास्थ्य के लिए दीवारों पर दिशा के अनुरूप हल्के एवं सात्विक रंगों का प्रयोग करना चाहिए।

जोड़ों का दर्द और गठिया
ध्यान रहे कि आपके भवन की दीवारें एकदम सही सलामत हों,उनमें कहीं भी दरार या रंग रोगन उड़ा हुआ या फिर दाग-धब्बे आदि न हों वरना वहां रहने वालों में जोड़ों का दर्द, गठिया, कमर दर्द, सायटिका जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

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