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जानें क्या है थायराइड, इसके प्रकार, लक्षण और 10 ऐसे घरेलू उपाय जो इसे रखतें हैं कंट्रोल!

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मोहित नागर
मोहित नागर
मोहित नागर एक कंटेंट राइटर है जो देश- विदेश, पॉलिटिक्स, एंटरटेनमेंट, हेल्थ और वास्तु से जुड़ी खबरों पर लिखना पसंद करते हैं। उन्होंने डॉ० भीमराव अम्बेडकर कॉलेज (दिल्ली यूनिवर्सिटी) से अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। मोहित को लगभग 3 वर्ष का समाचार वेब पोर्टल एवं पब्लिक रिलेशन संस्थाओं के साथ काम करने का अनुभव है।

नई‌ दिल्ली: अक्सर आपने बहुत से लोगों में थायराइड की समस्या को देखा होगा, और आज बदलती जीवनशैली में यह समस्या आम हो गई है। आपको बता दें थायराइड की समस्या उनमें से एक है जो मेटाबालिज्म से जुड़ी बीमारी है और महिलाओं में अधिक होती है। बता दें इस बिमारी में थायराइड हार्मोन का स्राव असंतुलित हो जाता है जिससे शरीर की समस्त भीतरी कार्यप्रणालियां अव्यवस्थित हो जाती हैं। एक सर्वे के अनुसार भारत देश में लगभग 4 करोड़ से भी ज्यादा लोग थायराइड के मरीज है। बदलते लाइफस्टाइल और तेजी से बढ़ता प्रदुषण, कीटनाशक दवाओं का सब्जियों और फसलों में इस्तेमाल, दवाओं के साइड इफ़ेक्ट, बेवजह आयोडीन युक्त नमक का प्रयोग, तनाव एवं अनियमित जीवनशैली, जंक फूड का अत्यधिक सेवन। अधिकतर लोगों को थायराइड की समस्या किसी अन्य बीमारी के समय होने वाली जांच से पता चलती है। थायराइड के दोनों प्रकार में रक्त की जांच जाती है। रक्त में टी थ्री, टी फोर एवं टी एस एच लेवल में सक्रिय हार्मोन्स का लेवल जांच किया जाता है।

आज के समय में यह समस्या आम होती जा रही है, पुरूषों की तुलना में इसके अधिकतर मामलें महिलाओं में देखे जाते हैं। इस बात का अंदाजा आप इस‌ बात से लगा सकते हैं कि थायराइड के दस मरीजों में से लगभग आठ महिलाएं होती हैं।

थाइराइड से पीड़ित महिलाओं को मोटापा, तनाव, अवसाद, बांझपन, कोलेस्ट्राल, आस्टियोपोरोसिस आदि परेशानियां हो सकती हैं। आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से थायराइड क्या है और किन घरेलू उपायों से आप थायराइड घर पर रह कर भी कंट्रोल कर सकते हैं।

Table of Contents

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थायराइड क्या है?

Thyroid शरीर का एक प्रमुख एंडोक्राइन ग्लैंड है जो तितली के आकार की होती है व गर्दन में श्वासनली (विंडपाइप) के सामने मौजूद होती है।। इसमें से थायराइड हार्मोन का स्राव होता है जो हमारे मेटाबालिज्म (चयापचय) की दर को संतुलित करते हैं। थायराइड हार्मोन के असंतुलन अर्थात कम या ज्यादा स्राव होने से अनेक शारीरिक परेशानियां होती हैं। यह थायराइड की समस्या भी दो प्रकार की होती है, पहली हाइपोथायराडिज़्म एवं दूसरी हायपरथायराडिज़्म।

हाइपोथायराडिज़्म थायराइड के लक्षण

  • हाइपोथायराडिज़्म में थायराइड ग्लैंड कम सक्रिय होती जिससे शरीर में आवश्यकता के अनुसार टी.थ्री व टी. फोर हार्मोन नहीं पहुंच पाता है।
  • इस बीमारी की स्थिति में वजन में अचानक वृद्घि हो जाती है जबकि भूख कम लगती है।
  • रोजाना की गतिविधियों में रूचि कम हो जाती है। ठंड बहुत महसूस होती है।
  • कब्ज होने लगता है।
  • आंखें सूज जाती हैं।
  • नींद अधिक आती है।
  • मासिक चक्र अनियमित हो जाता है।
  • त्वचा सूखी व बाल बेजान होकर झड़ने लगते हैं।
  • सुस्ती महसूस होती है। पैरों में सूजन व ऐंठन की शिकायत होती है।
  • इनकी कार्यक्षमता कम हो जाती है।
  • रोगी तनाव व अवसाद से घिर जाते हैं और बात-बात में भावुक हो जाते हैं।
  • जोड़ों में दर्द होता है।
  • मांसपेशियों में हल्का दर्द होता है।
  • चेहरा सूज जाता है।
  • आवाज रूखी व भारी हो जाती है।

हायपरथायराडिज़्म के लक्षण

  • हायपरथायराडिज़्म में थायराइड ग्लैंड बहुत ज्यादा सक्रिय हो जाती है और टी. थ्री, टी. फोर हार्मोन अधिक मात्रा में निकलकर रक्त में पहुंचता है।
  • इस स्थिति में वजन अचानक कम हो जाता है।
  • अत्यधिक पसीना आता है।
  • ये रोगी गर्मी सहन नहीं कर पाते।
  • इनकी भूख में वृद्घि होती है।
  • मांसपेशियां कमजोर हो जाती है।
  • निराशा हावी हो जाती है।
  • हाथ कांपते हैं और आंखें उनींदी रहती हैं।
  • आंखें बाहर आ जाएंगी, ऐसा लगता है। धड़कन बढ़ जाती है।
  • नींद नहीं आती या कम आती है।
  • दस्त होते हैं।
  • मासिक रक्तस्राव ज्यादा एवं अनियमित हो जाता है।
  • गर्भपात के मामले सामने आते हैं।

थायराइड कंट्रोल करने के कुछ घरेलू उपाय

यहां कुछ घरेलू उपचार दिए गए हैं जो थायराइड की समस्याओं को कम करने के लिए फायदेमंद हैं।

नारियल का तेल

नारियल के तेल में फैटी एसिड होते हैं जो थायरायड ग्रंथि के सही कामकाज में मदद करते हैं। नारियल तेल का संतुलित उपयोग वजन कम करने में मदद करता है, मेटाबॉलिज्म बढ़ाता है और शरीर के तापमान को संतुलित करता है।

एपल साइडर विनेगर

यह हार्मोन के संतुलित उत्पादन में मदद करता है। शरीर के वसा को रेग्युलेट करने, शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने और पोषक तत्वों के अवशोषण में सहायक है। इसे शहद और पानी में मिलाकर लिया जा सकता है।

अदरक

अदरक पौटेशियम और मैग्नीशियम जैसे आवश्यक खनिजों में समृद्ध है और इन्फ्लेमेशन से निपटने में मदद करता है। अदरक की चाय लेना सबसे आसान है।

Vitamin B

थायराइड की समस्याओं के कारणों से लड़ने में विटामिन मदद करते हैं। थायराइड फंक्शन के लिए बी फैमिली के विटामिन जरूरी हैं। विटामिन बी 12 हाइपोथायरायडिज्म से पीड़ित लोगों की मदद करने में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। रोजाना अंडे, मांस, मछली, फलियां, दूध और अखरोट शामिल करना, विटामिन बी की स्थिर आपूर्ति के साथ मदद कर सकता है।

Vitamin D

विटामिन डी की कमी से थायराइड की समस्या हो सकती है। शरीर इसे केवल सूरज के संपर्क में आने पर ही पा सकता है, इसलिए रोजाना 15 मिनट धूप लें। इससे रोगों से लड़ने की क्षमता भी बेहतर होगी। कुछ खाद्य पदार्थ जो विटामिन डी से भरपूर होते हैं, वे हैं डेयरी उत्पाद, तिल, संतरे का रस और अंडे की जर्दी। यदि शरीर में विटामिन डी का स्तर बहुत कम है, तो सप्लीमेंट्स आवश्यक होगा।

बादाम

थायराइड के स्वास्थ्य लिए बादाम सबसे उपयुक्त हैं। यह प्रोटीन, फाइबर और खनिजों का एक अच्छा स्रोत है। बादाम में सेलेनियम होता है जो थायराइड हेल्दी न्यूट्रिएंट है। यह मैग्नीशियम में भी बहुत समृद्ध है जो थायरायड ग्रंथि को आराम से काम करने में मदद कर सकता है।

दूध और इससे बने पदार्थ

दूध, पनीर और दही थायराइड के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं क्योंकि ये आयोडीन में हाई होते हैं जो थायराइड के सही तरह से काम के लिए आवश्यक है। यह विटामिन के स्तर को बढ़ाने में मदद करेंगे।

बीन्स

बीन्स फाइबर, प्रोटीन, आवश्यक खनिज और विटामिन से भरपूर होते हैं। यह एंटीऑक्सिडेंट और जटिल कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होते हैं। फाइबर अधिक होने से यह कब्ज से निपटने में मदद करता है जो हाइपोथायरायडिज्म का एक आम दुष्प्रभाव है।

अलसी का बीज

अलसी का बीज अच्छे फैटी एसिड से भरपूर होते हैं जो दिल और थायरायड के लिए अच्छे होते हैं। मैग्नीशियम और विटामिन बी 12 से भरपूर, अलसी का बीज हाइपोथायरायडिज्म से लड़ते हैं।

नियमित व्यायाम

थायराइड फंक्शनिंग को अच्छा बनाए रखने के सबसे महत्वपूर्ण है नियमित व्यायाम। दवाएं और प्राकृतिक उपचार ठीक हैं, लेकिन इसे उचित व्यायाम के साथ जोड़ा जाना चाहिए। नियमित व्यायाम हार्मोनल संतुलन में मदद करता है और बेहतर वजन के नियंत्रण में काम आता है जो थायराइड की समस्याओं से निपटने में मदद करता है।

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