कहीं आप भी तो भोजन के बाद नहीं धोते हैं थाली में हाथ, ऐसा करने से मां अन्नपूर्णा हो जाती है नाराज!

कहीं आप भी तो भोजन के बाद नहीं धोते हैं थाली में हाथ, ऐसा करने से मां अन्नपूर्णा हो जाती है नाराज!

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मोहित नागर
मोहित नागर
मोहित नागर एक कंटेंट राइटर है जो देश- विदेश, पॉलिटिक्स, एंटरटेनमेंट, हेल्थ और वास्तु से जुड़ी खबरों पर लिखना पसंद करते हैं। उन्होंने डॉ० भीमराव अम्बेडकर कॉलेज (दिल्ली यूनिवर्सिटी) से अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। मोहित को लगभग 3 वर्ष का समाचार वेब पोर्टल एवं पब्लिक रिलेशन संस्थाओं के साथ काम करने का अनुभव है।

हिन्दू धर्म में वास्तु को लेकर एक विशेष दर्जा दिया गया है, जिन घरों में वास्तु दोष रहता है वहां नकारात्मक ऊर्जा का वास रहता है और आपसी कलेश, स्वास्थ्य संबंधी बिमारियां और आर्थिक तंगी का मुंह देखना पड़ता है। लेकिन वहीं जिन घरों में वास्तु दोष बिल्कुल भी नहीं होता वहां हमेशा ही सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और घर परिवार में सुख शांति बनी रहती है साथ ही मां लक्ष्मी का भी आर्शीवाद बना रहता है। वास्तु दोष कई कारणों के चलते घर में मौजूद हो सकता है, इसमें घर में मौजूद हर एक वस्तु या फिर रह रहे व्यक्तियों की गलतियों के चलते।

आपने अक्सर बहुत से लोगों को खाना खाने के बाद में थाली में हाथ धोते हुए देखा होगा जबकि ऐसा नहीं करना चाहिए। क्योंकि हमारे धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, जिस थाली में हम खाना खाते हैं उसमें हाथ धोना अशुभ माना जाता है। जब थाली में हाथ धोते हैं उसमें बचें हुए भोजन‌ पर हाथ धोने से हम अन्न अनादर कर रहे होते हैं। हमारी इस गलती से मां अन्नपूर्णा और मां लक्ष्मी नाराज हो जाती है। आपको बता दें शास्त्रों में मुख्य देवता अग्नि को ही माना जाता है क्योंकि जब हम यज्ञ में सामग्री अर्पित करते हैं तो वह देवताओं को भोजन के रूप में ही मिलती है। इसके अलावा भी बहुत से पुराणों में अन्न का अपमान करना पाप का रूप माना जाता है।

• बनता है मां अन्नपूर्णा का नाराजगी का कारण

खाने थाली में हाथ धोने से उसमें बचे हुए उनका अपमान होता है साथ ही इससे मां लक्ष्मी और देवी अन्नपूर्णा नाराज होती है। जिससे घर में आर्थिक तंगी, गृह कलेश और बनते काम बिगड़ने लगते हैं। इसलिए कभी भी हमें मिल रहे भोजन का अपमान नहीं करना चाहिए।

• भोजन करते वक्त इन बातों का रखें विशेष ध्यान

  • खाना खाते समय हमेशा चटाई या पाट का उपयोग करना चाहिए और भोजन की थाली को सम्मानपूर्वक ही रखना है।
  • साथ ही हमें भोजन की थाली पकड़ते हुए दोनों हाथों का उपयोग करना चाहिए, माना जाता है कि एक हाथ से खाने की थाली पकड़ने पर भोजन प्रेत योनि में जाता है।
  • साथ ही हमें भोजन को कभी झूठा थाली में नहीं छोड़ना चाहिए। जितना खाया जाए उतना ही भोजन अपनी थाली में लेना चाहिए।
  • शास्त्रों के अनुसार खाना खाने से पूर्व भगवान का ध्यान करें और मां अन्नपूर्णा का धन्यवाद देते हुए ‘संसार में सभी भूखों को भोजन प्राप्त हो’, भगवान से ऐसी प्रार्थना करके भोजन करें।
  • भोजन करते समय बातचीत, क्रोध या अजीब सी आवाजें निकालने से बचें।

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