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केरल के वेटरन एयरोस्पेस इंजीनियर एस सोमनाथ होंगे इसरो के नए चीफ

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के नए अध्यक्ष के रूप में रॉकेट वैज्ञानिक एस सोमनाथ कार्यभार संभालेंगे।

इसरो के नए प्रमुख एस सोमनाथ कौन हैं?

1994 में, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में एक युवा इंजीनियर को अपने दो सिनियर इंजीनियरो के साथ लाइव पीएसएलवी रॉकेट की एक समस्या को ठीक करने के लिए शामिल किया गया था, जो कि लॉन्च के लिए तैयार था। अंतिम चरण में रॉकेट में एक समस्या का पता चला और बहुप्रतीक्षित रॉकेट लांच को रोक दिया गया। इसे ठीक करना सबसे खतरनाक काम था जिसे कोई भी नहीं कर सकता था, क्योंकि रॉकेट लगभग 200 टन खतरनाक ईंधन और रासायनिक कॉकटेल से भरा हुआ था। विशिष्ट प्रक्रिया का पालन करने का मतलब होगा रॉकेट को डी-आर्मिंग करना और उसके ईंधन को खत्म करना, इस प्रकार प्रक्षेपण में देरी करना। हालांकि, मिनटों के भीतर, समस्या को ठीक कर दिया गया और जिसके बाद रॉकेट ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था।

यह एक शुभारंभ था और पीएसएलवी (अब भारत के वर्कहॉर्स रॉकेट के संबंध में) की पहली सफल उड़ान थी। वह युवा वैज्ञानिक जो अपने वरिष्ठों के साथ उस अविश्वसनीय कार्य को करने के लिए शामिल हुआ, वह है इसरो के नवनियुक्त अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग के सचिव – डॉ. एस. सोमनाथ।

केरल के अलाप्पुझा के रहने वाले, डॉ. एस. सोमनाथ मलयालम माध्यम में अपनी स्कूली शिक्षा के समय से ही विज्ञान के प्रति उत्साही थे। हालांकि एक हिंदी भाषा के शिक्षक, सोमनाथ के पिता ने युवा लड़के के विज्ञान के प्रति जुनून और योग्यता को प्रोत्साहित किया, उसे अंग्रेजी और मलयालम दोनों में विज्ञान की किताबें दी।

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सोमनाथ ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक करना चुना, जिसके दौरान उन्होंने अंतरिक्ष विज्ञान और अनुसंधान में गहरी रुचि विकसित की।

एक कॉलेज के छात्र के रूप में, सोमनाथ ने विशेष रूप से अपने प्रोफेसर से उन्हें प्ररपल्‌श्‌न्‌ propulsion (रॉकेटरी में एक विशिष्ट विषय, जिसे इंजीनियरिंग के हिस्से के रूप में नहीं पढ़ाया जाता है) पर एक पाठ्यक्रम पढ़ाने का अनुरोध किया था।

केरल के कोल्लम में टीकेएम कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में उनके कॉलेज में पहली बार ऐसा विषय पढ़ाया जाने के बावजूद, दस छात्रों ने उस कोर्स को लिया था।

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी युवा इंजीनियरों की भर्ती के लिए ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण वाहन (पीएसएलवी) कार्यक्रम में शामिल होने के लिए भर्ती कर रही थी। और सोमनाथ ने इसरो में नौकरी के लिए आवेदन किया था। पिछले सेमेस्टर में उनके उच्च स्कोर के कारण, उनको भर्ती किया गया था।

वह 1985 में इसरो के विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) में शामिल हुए और पीएसएलवी रॉकेट के शुरुआती चरणों के दौरान एकीकरण के लिए एक टीम लीडर थे। वह 2003 के दौरान जीएसएलवी एमके III प्रोजेक्ट में शामिल हुए। वह जून 2010 से 2014 तक जीएसएलवी एमके-III के प्रोजेक्ट निदेशक थे।

सिनेमा के एक उत्साही प्रशंसक, डॉ सोमनाथ कभी केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में फिल्म समाज और इसी तरह के समूहों के सदस्य थे। हालाँकि, उनके कठोर कार्यक्रम के कारण, सिनेमा कुछ ऐसा था जिसे बैकबर्नर पर रखना पड़ा। डॉ. सोमनाथ का विवाह वलसाला से हुआ है, जो वस्तु एवं सेवा कर विभाग में कार्यरत हैं। दंपति के दो बच्चे हैं, दोनों ने इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री हासिल की है।

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