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क्या आप जानते हैं National Herald case क्या है, आखिर क्यों Rahul Gandhi आए सवालों के घेरे में ? आइए इसके बारे में विस्तार से जानें

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मोहित नागर
मोहित नागर
मोहित नागर एक कंटेंट राइटर है जो देश- विदेश, पॉलिटिक्स, एंटरटेनमेंट, हेल्थ और वास्तु से जुड़ी खबरों पर लिखना पसंद करते हैं। उन्होंने डॉ० भीमराव अम्बेडकर कॉलेज (दिल्ली यूनिवर्सिटी) से अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। मोहित को लगभग 3 वर्ष का समाचार वेब पोर्टल एवं पब्लिक रिलेशन संस्थाओं के साथ काम करने का अनुभव है।

कभी किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र पर शासन करने वाले उस परिवार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगेंगे, जिसने देश को तीन तीन प्रधानमंत्री दिये हैं. जी हां, हम बात कर रहे हैं देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की। पंडित नेहरु के खानदान की तीसरी पीढ़ी पर उस नेशनल हेराल्ड को लेकर भ्रष्ट्चार के आरोप लगे हैं, जिसने आजादी की लड़ाई में अंग्रजों के पसीने छुड़ा दिये थे। राहुल गांधी और उनकी मां सोनिया गांधी पर नेशनल हेराल्ड को लेकर पैसों की हेराफेरी के आरोप हैं और प्रवर्तन निदेशालय इसी मामले में कांग्रेस नेता और शेयर धारक राहुल गांधी से पूछताछ कर रही है।

अब सवाल है कि ये नेशनल हेराल्ड मामला है क्या और क्यों इस मामले में गांधी परिवार के राहुल गांधी और उनकी मां सोनिया का नाम आया है, और पूछताछ हो रही है?

नेशनल हेराल्ड की कहानी राष्ट्रवादी प्रेस की भूमिका से शुरु होकर एक ऐसे सोदे तक जाती है जिसके नतीजे में हजारों शेयर धारकों का हक एक परिवार के स्वामित्व वाली कंपनी के तहत आ जाती है और ये परिवार है गांधी नेहरु परिवार।

नेशनल हेराल्ड एक अखबार था जिसकी स्थापना पंडित जवाहर लाल नेहरु ने 1938 में की थी। इसकी प्रकाशक थी एसोसियेट जर्नल्स लिमिटेड, यानी AJL नाम की कंपनी। AJL की स्थापना एक साल पहले यानी 1937 में हुई थी। इस कंपनी को करीब पांच हजार स्वतंत्रता सैनानियों ने मिल कर खड़ा किया था और सभी इस कंपनी के शेयरधारक थे। ये अखबार ऐसे समाचारों के संकलन पर जोर देता था जिसमें स्वाधीनता आंदोलन की ज्यादा से ज्यादा जानकारी और अंग्रेजी दमन की आलोचना होती थी। AJL कंपनी उस समय तीन अखबार निकालती थी, अंग्रेजी में नेशनल हेराल्ड, हिंदी में नवजीव और उर्दू में कौमी आवाज।

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इन तीनों में नेशनल हेराल्ड सबसे मशहूर था क्योंकि ये अंग्रेजी भाषा में थी, और इसमें उस समय के जाने माने लोगों और विचारकों के लेख छपा करते थे। इस अखबार ने अंग्रेजी सरकार की नाक में दम कर दिया था। अपनी आलोचना से परेशान अंग्रेज सरकार ने 1942 में इस अखबार पर बैन लगा दिया। तीन साल तक अखबार बंद रहा।

आजादी के बाद पंडित नेहरु ने प्रधनमंत्री बनने के बाद इस अखबार के बोर्ड के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया लेकिन कांग्रेस से अखबार का संबंध बना रहा। कांग्रेस के आर्थिक हित अखबार से जुड़े रहे।

लेकिन समय के साथ नेशलन हेराल्ड के पाठकों की संख्या मे कमी आई। घाटे में चल रहे अखबार को 2008 में बंद कर दिया गया। जिस समय ये अखबार बंद हुआ ,उस समय अखबार पर शेयर धारकों और कांग्रेस पार्टी का 90 करोड़ रुपया का कर्ज था। 2010 में अखबार ने इस 90 करोड़ के कर्ज को यंग इंडियन नाम की कंपनी के नाम ट्रांसफर कर दिया जाता है ,यानी अब ये कर्ज यंग इंडियन कंपनी को चुकानी थी।

यंग इंडियन वो कंपनी थी जिसमें कांग्रेस के कई बड़े नेता शामिल थे। इस कंपनी में 38 फीसदी के मालिक सोनिया गांधी,औऱ 38 फीसदी के मालिक राहुल गांधी हैं , इसके अलावा इसके अलावा बाकी बचे 24 फीसदी हिस्सा मोती लाल वोरा, आस्कर फर्नांडिस, समन दुबे और सैम पित्रोदा के नाम था।

यंग इडियन कंपनी एक चेरेटेबल कंपनी के तौर पर रजिस्टर की गई थी। यानी कंपनी एक्ट के मुताबिक ऐसी कंपनी को अगर मुनाफा होता है तो वो पैसा कंपनी में ही रहता है, किसी शेयर धारक को नहीं मिलता है.उस पैसे को फिर से कंपनी के कामों में ही निवेश किया जाता है।

AJL और यंग इंडियन के बीच जो सौदा हुआ उसमें कंपनी ने मात्र पचास लाख रुपये में नेशनल हेलराल्ड के सारे शेयर और कंपनी का मालिकाना हक यंग इंडियन के नाम कर दिया।
लेकिन यहां गौर करने वाली बात ये थी कि जिस समय AJL ने पचास लाख में अपने सारे शेयर यंग इंडियन को ट्रांसफर किये उस समय भी AJL के पास अलग अलग शहरों दिल्ली,लखनउ,भोपाल,इंदौर,मुंबई,पटना जैसे शहरों में बेशकीमती जमीनें और इमारतें थीं जिसकी कीमत तकरीबन 2000 करोड़ आंकी गई थी.जब AJL ने यंग इंडियन को अपने शेयर के साथ मालिकाना हक दिया तो कंपनी को इन संपत्तियों का भी मालिकाना हक मिल गया। यानी यंग इंडियन को 2000 करोड़ की संपत्ति मात्र पचास लाख में मिल गई।

2010 में ये सौदा हुआ,सौदे के दो साल बाद भाजपा नेता और गांधी परिवार पर वक्र दृष्ठि रखने वाले नेता सुब्रमन्यम स्वामी ने दिल्ली की एक अदालत में मामला दर्ज करवाया कि गांधी परिवार ने AJL के साथ मिलकर नेशनल हेराल्ड के शेयरधारकों के साथ घोखाधड़ी की है..स्वामी ने कहा कि पास लाख में 2000 करोड़ की संपत्ति यंग इंडियन को ट्रांसफर हो जाना अपने आप में घोटाला है। स्वामी ने ये भी आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी को चंदे से मिले पैसे से गांधी परिवार ने AJL को बिना ब्याज कर्जा दिया और बाद में सिर्फ पचास लाख में सारे कर्ज माफ करवा दिये।

2014 में स्वामी की याचिका पर अदालत ने संज्ञान लिया,इस समय तक देश में सरकार बदल चुकी थी,और केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बन गई थी.अगस्त 2014 में ED ने इस मामले में केस रजिस्टर किया। मनीलांड्रिंग एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ और सम्मन जारी हुए। इस मामले में सोनिया गांधी,राहुल गांधी, मोतीलाल वोरा, अस्कर फर्नांडिस के नाम भी हैं लेकिन अब वो इस दुनिया में नहीं है तो मामला अब बचे हुए आरोपियों पर चल रहा है। 2014 में गांधी परिवार को इस मामले मे स्टे मिला था लेकिन मामला खारिज नहीं हुआ था।

गांधी परिवार ने इस मामले के राजनीतिक दुर्भावनाओ से प्रेरित बताया लेकिन 2015 में ट्रायल कोर्ट ने कहा कि इस मामले मे राजनीतिक शत्रुता जैसी कोई बात दिखाई नहीं देती है।
2016 में सुप्रीम कोर्ट मे भी ये मामले गया लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी आरोपियों के अदालती कार्रवाई का सामना करना चाहिये ताकि न्याय हो सके।
1जून 2022 को ईडी ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी को पूछताछ के लिए पेश होने का आदेश दिया, लेकिन खराब तबियत के कारण सोनिया गांधी अस्पताल में भर्ती है, इस लिए केवल राहुल गांधी ईडी के सामने पेश हुए हैं।

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