National Logistics Policy

National Logistics Policy की आज होगी घोषणा? जानें इस योजना के बारे में और इससे क्या लाभ होंगे?

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मोहित नागर
मोहित नागर
मोहित नागर एक कंटेंट राइटर है जो देश- विदेश, पॉलिटिक्स, एंटरटेनमेंट, हेल्थ और वास्तु से जुड़ी खबरों पर लिखना पसंद करते हैं। उन्होंने डॉ० भीमराव अम्बेडकर कॉलेज (दिल्ली यूनिवर्सिटी) से अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। मोहित को लगभग 3 वर्ष का समाचार वेब पोर्टल एवं पब्लिक रिलेशन संस्थाओं के साथ काम करने का अनुभव है।

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 72वां जन्मदिन है। इस मौके पर पीएम मोदी देश की नई राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति की घोषणा करेंगे। इस नई नीति में कुछ ऐसे बदलाव देखने को मिलेंगे, जिससे इकोनॉमी को रफ्तार पकड़ने में मदद मिलेगी। नेशनल लॉजिस्टिक पॉलिसी से कारोबार जगत को काफी उम्मीद है।

इस नीति के द्वारा सप्लाई साइड की समस्याओं को दूर करने पर जोर दिया जाएगा। साथ ही माल ढुलाई में होने वाली ईंधन की खपत को कम करने को लेकर भी एहम फैसले लिए जाने की उम्मीद है। आपको बता दें कि भारत में लॉजिस्टिक्स (माल ढुलाई) के लिए सड़क परिवहन, जल परिवहन और हवाई मार्ग का इस्तेमाल किया जाता है।

पीएम मोदी 17 सितंबर को इस नई नीति को पेश करेंगे। जिससे देशभर में माल ढुलाई का काम तेजी से किया जा सकेगा। इस पर वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बताया है कि भारत की जीडीपी का लगभग 13 से 14% हिस्सा लॉजिस्टिक्स पर खर्च किया जाता है, वहीं आपको जानकर हैरानी होगी कि जापान और जर्मनी आदि देश इसके लिए 8 से 9% ही खर्च करते हैं।

क्या है नेशनल लॉजिस्टिक पॉलिसी?

लॉजिस्टिक्स से जुड़ी नई नीति में सभी मसलों के लिए सिंगल रेफरेंस पॉइंट बनाया जाएगा। जिससे अगले 10 सालों में लॉजिस्टिक्स सेक्टर की लागत को 10% तक लाया जाएगा। जो फिलहाल जीडीपी का 13 से 14% है। देश में लॉजिस्टिक्स का ज्यादातर का काम सड़कों के ज़रिए किया जाता है। नई नीति में अब रेल ट्रांसपोर्ट, शिपिंग और एयर ट्रांसपोर्ट पर फोकस किया जाएगा।

आपको बता दें कि भारत सरकार राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति पर तीन साल से काम कर रही है। इस साल केवित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में कहा था कि नई नीति में केंद्र सरकार, राज्य सरकार और अन्य संस्थाओं का रोल स्पष्ट कर दिया जाएगा। साथ ही सिंगल विंडो ई-लॉजिस्टिक्स मार्केट बनाया जाएगा। जिससे रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए छोटे और मझले उद्यमों को बढ़ावा दिया जाएगा।

नई लॉजिस्टिक्स निति के तहत लगभग 50 प्रतिशत कार्गो को रेलवे के ज़रिए भेजा जाएगा। जिससे सड़कों पर ट्रैफिक कम होगा। तेल के आयात में कमी आएगी और लॉजिस्टिक्स का खर्च भी कमी होगा। विश्व बैंक लॉजिस्टिक्स इंडेक्स 2018 में भारत लॉजिस्टिक्स के खर्च के मामले में 44 वें स्थान पर है। वहीं अमेरिका और चीन क्रमश: 14वें और 26वें स्थान पर हैं। लॉजिस्टिक्स के खर्च के मामले में जर्मनी नंबर 1 पर है, जिसका खर्च सबसे कम है। आपको बता दें कि भारत में लॉजिस्टिक्स का मार्केट 215 बिलियन डॉलर से भी ज्यादा है। जो सालाना 10.5 % के कंपाउंड रेट से बढ़ रहा है।

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