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संसदीय समिति ने वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क सर्विस पर पाबंदी लगाने का किया प्रस्ताव, जाने क्या है VPN?

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नई दिल्ली: पिछले महीने संसदीय समिति ने भारत सरकार से वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) सर्विसेस को बंद करने की सिफारिश की है। समिति का कहना है कि VPN की वजह से साइबर सुरक्षा को खतरा पैदा हो रहा है। साइबर अपराधी VPN का इस्तेमाल कर अपनी पहचान गुप्त रखते हैं और गिरफ्तारी से बच जाते हैं। साइबर हमले बढ़ते जा रहे हैं, ऐसे में VPN को भारत में बैन करना जरूरी हो गया है।

वहीं गृह मंत्रालय से जुड़ी संसद की स्थाई समिति का कहना है कि VPN और डार्क वेब के इस्तेमाल पर काबू करना बेहद जरूरी हो गया है। VPN की मदद से साइबर अपराधी फायर वॉल्स में सेंध लगा रहे हैं। एन्फोर्समेंट एजेंसियां भी इन्हें पकड़ नहीं पा रही हैं। ऐसे में इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स (ISP) की मदद लेकर VPN सर्विसेस को बैन करना होगा।

VPN यानी वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क। यह एक ऐसा टूल है, जो आपको प्राइवेट नेटवर्क बनाने में मदद करता है। भले ही आप जियो, एयरटेल, BSNL की ब्रॉडबैंड का इस्तेमाल कर रहे हों, VPN आपको अपना प्राइवेट नेटवर्क बनाने की इजाजत देता है। प्राइवेट नेटवर्क का मतलब है कि आप सीमित लोगों से या अपने होम नेटवर्क कनेक्शन से जुड़े रहते हैं।

VPN का प्रमुख काम है नेटवर्क ट्रैफिक को एन्क्रिप्ट करना। यानी आपके आईपी (IP या इंटरनेट प्रोटोकॉल) एड्रेस और लोकेशन को छिपाना।
अगर आप किसी ब्रॉडबैंड कंपनी के नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे हैं तो उस इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर (ISP) को सब पता होता है कि आप क्या वेबसाइट्स देख रहे हैं? आप क्या डाउनलोड कर रहे हैं? इतना ही नहीं, आपकी ऑनलाइन हिस्ट्री भी उसके पास होती है। इसकी मदद से ही वह आपकी ऑनलाइन एक्टिविटी के दौरान आपको विज्ञापन भी दिखाता है।

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आसान शब्दों में इंटरनेट एक समुद्र की तरह है और VPN उसमें एक पाइप की तरह। इंटरनेट के समुद्र में कई हैकर मौजूद हैं, जो डेटा चुराने की ताक पर रहते हैं। वर्चुअल नेटवर्क चुनिंदा कंप्यूटरों को ही आपस में जोड़ता है। खबरों के मुताबिक, ग्लोबल VPN प्रोवाइडर एटलस VPN ने अगस्त में दावा किया कि 2021 की पहली छमाही में भारत में 348.7 मिलियन VPN इंस्टॉल हुए हैं। यह 2020 के मुकाबले 671% की ग्रोथ बताता है।

VPNs पर प्रतिबंध लगाने से कई कंपनियों की वर्क फ्रॉम होम या रिमोट वर्किंग की योजना खतरे में पड़ जाएगी। ज्यादातर कंपनियां चाहेंगी कि आप सिक्योर इंटरनेट कनेक्शन का ही इस्तेमाल करें, जो आपको ऑफिस में उपलब्ध रहता है।

आपका इंटरनेट कनेक्शन थर्ड पार्टी साइबर हमलों का शिकार हो सकता है। मालवेयर आपके पासवर्ड चुरा सकते हैं। आप उस कंटेंट को भारत में नहीं देख सकेंगे, जो यहां प्रतिबंधित है। इसी तरह आप ऑनलाइन प्राइवेसी का एक महत्वपूर्ण टूल खो देंगे।

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