President Election: कौन है द्रौपदी मुर्मू, इनका पलड़ा क्यों है भारी, क्या रेस से बाहर हैं यशवंत सिन्हा? - Duniyakamood

President Election: कौन है द्रौपदी मुर्मू, इनका पलड़ा क्यों है भारी, क्या रेस से बाहर हैं यशवंत सिन्हा?

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राजन चौहान
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मेरा नाम राजन चौहान हैं। मैं एक कंटेंट राइटर/एडिटर दुनिया का मूड न्यूज़ पोर्टल के साथ काम कर रहा हूँ। मेरे अनुभव में कुछ समाचार चैनलों, वेब पोर्टलों, विज्ञापन एजेंसियों और अन्य के लिए लेखन शामिल है। मेरी एजुकेशन बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी (सीएसई) हैं। कंटेंट राइटर के अलावा, मुझे फिल्म मेकिंग और फिक्शन लेखन में गहरी दिलचस्पी है।

President Election 18 जुलाई को होना है। जिसको लेकर सरगर्मी बढ़ती जा रही है। कई दिन से पक्ष और विपक्ष दोनो राष्ट्रपति उम्मीदवार के नाम पर विचार कर रहे थे। भारतीय जनता पार्टी ने एनडीए की ओर से ओडिशा की आदिवासी नेता द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार चुना है। वहीं विपक्ष ने पुराने भाजपाई नेता यशवंत सिन्हा को राष्ट्रपति उम्मीदवार के रुप में चुना है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों में से कौन जीतेगा।

राष्ट्रपति चुनाव में कौन देता है वोट-

अगर आपके मन में भी यह सवाल आ रहा है कि इसके लिए वोटिंग कौन करता है तो आपको बता दें कि राष्ट्रपति चुनाव में वोटिंग राज्य विधानसभाओं के सदस्यों और राज्यसभा और लोकसभा के सदस्यों द्वारा की जाती है। 2022 में निर्वाचक मंडल में 233 राज्यसभा सांसद (नामित सदस्यों को छोड़कर), 543 लोकसभा सांसद और देश भर के 4,033 विधायक शामिल हैं।

इस चुनाव के लिए सांसदों के वोटों का कुल मूल्य 5,43,200 और विधायकों के वोटों का 5,43,231 आंका गया है, जिससे इलेक्टोरल वोटों का कुल मूल्य 10,86,431 हो गया है। निष्पक्ष प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए 50% वोट संघ (लोकसभा और राज्यसभा सांसद) और 50% राज्यों (विधायकों) के पास होते हैं।

एक उम्मीदवार को इन चुनावों को जीतने के लिए एक साधारण बहुमत चाहिए, जो कि डाले गए वोटों का 50% प्लस एक वोट है। मतदाता अपने विवेक के अनुसार मतदान कर सकते हैं। ऐसे में क्रॉस वोटिंग की गुंजाइश है।

23 जून को तीन लोकसभा सीटों (उत्तर प्रदेश में दो और पंजाब में एक) और सात विधानसभा सीटों (त्रिपुरा में चार, झारखंड, आंध्र प्रदेश और दिल्ली में एक-एक) के लिए उपचुनाव होने हैं।

द्रौपदी मुर्मू का पलड़ा क्यों भारी है-

20 जून 1958 को ओडिशा के मयूरभंज जिले के बैदापोसी गांव में जन्मी द्रौपदी मुर्मू को इस बार राष्ट्रपति उम्मीदवार चुना गया है। उनके पिता का नाम बिरंची नारायण टुडू है. मुर्मू आदिवासी संथाल परिवार से ताल्लुक रखती हैं. द्रौपदी मुर्मू के दो बेटे और एक बेटी थे. इनका विवाह श्याम चरण मुर्मू से हुआ था. लेकिन शादी के कुछ समय बाद पति और दोनों बेटों की मृत्यु हो गई. इन्होनें एक टीचर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। बाद में ओडिशा के सिंचाई विभाग में एक कनिष्ठ सहायक यानी क्लर्क के नौकरी पा ली।

द्रौपदी मुर्मू को एनडीए ने राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार चुना है, एनडीए के पास अभी कुल 5,26,420 मत हैं। जबकि राष्ट्रपति चुनाव जीतने के लिए मुर्मू को 5,39,420 मतों की आवश्यकता है। ओडिशा से होने के कारण सीधे तौर पर मुर्मू को बीजू जनता दल(बीजद) के 31000 मत भी मिल रहे है। ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने पहले ही इनको समर्थन दे दिया है। अगर वाईएसआर कांग्रेस साथ आती है तो 43000 मत और मिल जाएंगे। झारखंड मुक्ति मोर्चा के लिए आदिवासी के नाम पर मुर्मू का विरोध करना मुश्किल है। झारखंड मुक्ति मोर्चा पर दबाव बना तो मुर्मू को करीब 20000 वोट और मिल सकते है।

सिन्हा का पलड़ा क्यों कमजोर

द्रौपदी मुर्मू के सामने यशवंत सिन्हा का पलड़ा काफी कमजोर है। विपक्ष ने यशवंत सिन्हा को उम्मीदवार चुना है, उनके पास अभी 3,70,709 वोट हैं। हालांकि, यह भी अब देखना यह है कि राजग के सामने विपक्षी एकता कितने समय तक टिक पाती है।

क्या है स्थिति-

राजग- कुल मत : 5,26,420
जीत के लिए जरूरी : 5,39,420
बीजद (31,000 मत), वाईएसआर कांग्रेस (43,000 मत) का समर्थन मिलने पर सत्तारूढ़ राजग के पास कुल मत : 6,00,420

विपक्ष : सिन्हा
विपक्ष के पास करीब 3,70,709 वोट है-
सपा : 28,688
यूपीए : 2,59,000
टीएमसी : 58,000
वाम दल : 25,000 वोट

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