सितोपलादि चूर्ण क्या है, जानें इसका फायदे और नुकसान क्या है

सितोपलादि चूर्ण क्या है, जानें इसका फायदे और नुकसान क्या है

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मोहित नागर
मोहित नागर
मोहित नागर एक कंटेंट राइटर है जो देश- विदेश, पॉलिटिक्स, एंटरटेनमेंट, हेल्थ और वास्तु से जुड़ी खबरों पर लिखना पसंद करते हैं। उन्होंने डॉ० भीमराव अम्बेडकर कॉलेज (दिल्ली यूनिवर्सिटी) से अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। मोहित को लगभग 3 वर्ष का समाचार वेब पोर्टल एवं पब्लिक रिलेशन संस्थाओं के साथ काम करने का अनुभव है।

सितोपलादि चूर्ण एक आयुर्वेदिक दवा है जिसमें मिश्री, इलायची, दालचीनी, पिप्पली और अन्य सामग्री शामिल होती है। इसका मुख्य काम पाचन और इम्यून सिस्टम को संतुलित करना है। जब ब्रोन्कियल स्थितियों और ऊपरी श्वास के बंद होने के लिए सितोपलादि चूर्ण सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है।

Table of Contents

सितोपलादि चूर्ण के फायदे और नुकसान

खांसी के इलाज में

किसी भी तरह की खांसी होने पर सितोपलादि चूर्ण का सेवन सबसे अधिक फायदेमंद माना जाता है। इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण सभी प्रकार की खांसी के इलाज में कारगर होते है। गर्भावस्था के दौरान होने वाली खांसी का भी सितोपलादि चूर्ण प्रभावी ढंग से इलाज करता है। इसके एंटी वायरल गुण खांसी के इंफेक्शन को कम करने में मदद करते हैं।

गले में खराश के इलाज में

सितोपलादि चूर्ण गंधक रसायन, यशद भस्म और प्रवाल पिष्टी आदि अन्य आयुर्वेदिक दवाओं से बना होता है जो गले की खराश के लिए प्रभावी है। इस आयुर्वेदिक मेल के एंटी- माइक्रोबियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण स्ट्रेप्टोकोकल इन्फेक्शन का एक शक्तिशाली उपाय है।

अस्थमा में

अस्थमा के मरीजों के लिए सितोपलादि चूर्ण का सेवन काफी फायदेमंद होता है। क्योंकि इसका सेवन सूजन और बलगम जैसी समस्याओं को कम करने में सहायक होता है।

पाचन तंत्र को सही रखने में

इसका सेवन पेट के लिए काफी फायदेमंद होता है। क्योंकि इसके सेवन से पाचन तंत्र सही रहता है। सितोपलादि चूर्ण से कब्ज, एसिडिटी आदि समस्याओं से छुटकारा मिलता है।

माइग्रेन के उपचार में

सितोपलादि चूर्ण का सेवन माइग्रेन की शिकायत होने पर काफी फायदेमंद होता है। क्योंकि इसमें एंटी इंफ्लेमेटरी तत्व पाये जाते हैं, जो दर्द को कम करने में मदद करते है।

एनीमिया की बीमारी में

सितोपलादि चूर्ण का सेवन करने से एनीमिया की बीमारी होने पर भी लाभदायक साबित होता है। क्योंकि इसका सेवन करने से शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ता है।

सितोपलादि चूर्ण के नुकसान

  • -सितोपलादि चूर्ण का सेवन डायबिटीज के मरीजों को अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे उनका शुगर लेवल बढ़ सकता है।
  • -सितोपलादि चूर्ण का सेवन गर्भवती महिलाओं को नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसका सेवन करने से उनका स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।
  • -सितोपलादि चूर्ण का अधिक मात्रा में सेवन करने से गैस की समस्या हो सकती है।

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