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The Kashmir Files: एक तरफ हो रहा बवाल, तो दूसरी तरफ मिल रहा प्यार, जानें इस फिल्म से जुड़ी कुछ अहम बातें

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मोहित नागर
मोहित नागर
मोहित नागर एक कंटेंट राइटर है जो देश- विदेश, पॉलिटिक्स, एंटरटेनमेंट, हेल्थ और वास्तु से जुड़ी खबरों पर लिखना पसंद करते हैं। उन्होंने डॉ० भीमराव अम्बेडकर कॉलेज (दिल्ली यूनिवर्सिटी) से अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। मोहित को लगभग 3 वर्ष का समाचार वेब पोर्टल एवं पब्लिक रिलेशन संस्थाओं के साथ काम करने का अनुभव है।

विवेक अग्निहोत्री द्वारा लिखित और निर्देशित फिल्म The Kashmir Files एक ऐसी फिल्म है, जिसने हर भारतीय को अंदर तक झकझोर कर रख दिया है। रोम्टे खड़े कर देने वाली ये फिल्म Kashmiri Pandit पर हुए अत्याचार की कहानी है। इस फिल्म में वो सब दिखाया गया है, जिससे देश की जनता अंजान थी। यह फिल्म पहले 26 जनवरी 2022 को रिलीज़ होने वाली थी लेकिन कोरोना वायरस और ओमिक्रोन के कारण यह अभी 11 मार्च 2022 को रिलीज़ हुई है। 4 मार्च 2022 को इसका स्पेशल प्रीमियर हुआ था। इसमें अनुपम खेर, दर्शन कुमार, मिथुन चक्रवर्ती, पल्लवी जोशी, भाषा सुंबली, चिन्मय मांडलेकर, पुनीत इस्सर, प्रकाश बेलावड़ी, अतुल श्रीवास्तव जैसे बड़े कलाकारों ने काम किया है। इस फिल्म को लोग जितना पसंद कर रहे हैं, उतना शायद ही किसी फिल्म को पसंद किया गया हो। इसे हरियाणा, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में Tax Free किया गया था।

इस फिल्म में कश्मीर के इतिहास से जुड़े कुछ ऐसे फैक्ट्स का जिक्र किया गया है जिसे शायद ही कोई जानता होगा। इस फिल्म के अंत में दर्शन कुमार ने एक किताब का जिक्र किया है। जिसका नाम है तोहफतुल अहबाब (Tohfatu’l Ahbab)। यह किताब फारसी में लिखी गई थी और इसे प्रोफेसर डॉक्टर काशी नाथ पंडिता ने अंग्रेजी में ट्रांसलेट किया था। जिसका नाम ‘A Muslim missionary in mediaeval Kashmir’ रखा गया। ये किताब फारसी भाषा में लिखी गई एक बायोग्राफी है जिसमें ईरानियन इस्लामिक मिशनरी शम्सउद्दीन अराकी की कहानी बताई गई है। अराकी 1478 में कश्मीर पहली बार आया था और वो सूफी घराने नूरबख्शिया का फॉलोवर था। इसे ईरानी सूफी स्कॉलर नूर बक्श ने शुरू किया था।

इस फिल्म के अंत में कश्मीर के खूबसूरत इतिहास के बारे में बताया गया है। माना जाता है कि कश्मीरी पंडितों की संस्कृति लगभग 6000 साल पुरानी है और वो कश्मीर के मूल निवासी माने जाते हैं। कहा जाता है कि ‘पृथ्‍वी पर स्‍वर्ग’ है तो कश्मीर है। इसमें कोई दो राय नहीं, फिल्म में बताया गया है कि कश्मीर का नाम कश्यप ऋषि के नाम पर पड़ा था। कश्मीर के सभी मूल निवासी हिंदू थे। मुस्लिमों की बात करें तो 14वीं शताब्दी में तुर्किस्तान से आए मुस्लिम आतंकी दुलुचा ने 60,000 लोगों की सेना के साथ कश्मीर पर आक्रमण किया था और कश्मीर लोगों का धर्म बदलवा दिया था।

उसने नगरों और गांवों को नष्ट कर दिया और हजारों हिंदुओं का नरसंहार किया। हजारों हिंदुओं को जबरदस्ती मुस्लिम बनाया गया। जो हिंदू इस्लाम कबूल नहीं करना चाहते थे, उन्होंने आत्महत्या कर ली थी। वहीं, कई वहां से जान बचाकर निकल गए थे। कश्मीर में हिन्दूओं पर अत्याचार उसी वक्त से चल रहा है। बाद में यह राज्य अकबर के शासन में मुगल साम्राज्य का हिस्सा बन गया। साल 1756 से अफगान शासन के बाद वर्ष 1819 में यह राज्य पंजाब के सिख साम्राज्य के अधीन हो गया। वर्ष 1846 में रंजीत सिंह ने जम्मू क्षेत्र महाराजा गुलाब सिंह को सौंप दिया।

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इस फिल्म में इसके बाद के हुए अत्याचारों के बारे में बताया गया है। एक तरफ दिखाया गया है कि कैसे धारा 370 हटने के बाद पूरे देश में एक तरफ बवाल मचा हुआ था, तो एक तरफ लोग सुकून की नींद सो रहे थे। इस फिल्म में कई दिल दहला देने वाले सीन भी मौजूद हैं। इस फिल्म को एक तरफ लोग बहुत पसंद कर रहे हैं और कह रहे हैं, कि मोदी सरकार में ऐसी फिल्में बननी चाहिए, तो दूसरी तरफ लोग कह रहे हैं, कि इस फिल्म को बनाने के पीछे सरकार का एक अल प्रोपेगेंडा है। अगर आपने यह फिल्म नहीं देखी है तो एक बार इस फिल्म को जरूर देखें।

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