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वास्तु शास्त्र: मंदिर में घंटी बजाने से घर में होता है सकारात्मकता ऊर्जा का प्रवेश, पढ़ें पूरी जानकारी!

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मोहित नागर
मोहित नागर
मोहित नागर एक कंटेंट राइटर है जो देश- विदेश, पॉलिटिक्स, एंटरटेनमेंट, हेल्थ और वास्तु से जुड़ी खबरों पर लिखना पसंद करते हैं। उन्होंने डॉ० भीमराव अम्बेडकर कॉलेज (दिल्ली यूनिवर्सिटी) से अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। मोहित को लगभग 3 वर्ष का समाचार वेब पोर्टल एवं पब्लिक रिलेशन संस्थाओं के साथ काम करने का अनुभव है।

नई दिल्ली: हिन्दू धर्म में वास्तु का खास महत्व माना गया है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर को वास्तु दोष से बचाए रखने के लिए सिर्फ सही दिशा का होना ही जरूरी नहीं है। बल्कि घर की दीवारों और घर में रखी चीजों पर भी खास ध्यान देने की जरूरत होती है। घर का वास्तु सही हो और वास्तु के अनुसार घर में सजावट की चीजें रखी गई हों, तो सुख समृद्धि बनी रहती है। वहीं घर में यदि आपको सुकून की नींद, अच्छा सेहतमंद भोजन और भरपूर प्यार-अपनत्व नहीं मिल रहा है तो इसका मतलब कि घर में वास्तु दोष है। इसलिए सिर्फ घर की दिशा ही नहीं बल्कि घर के अंदर रखी वस्तुओं पर भी ध्यान देना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में मौजूद कुछ चीजें भी परिवार की तरक्की में बाधा बन सकती हैं।

वास्तु शास्त्र में आज हम आपको बताएंगे घंटे की स्थापना के बारे में। योगिनी तंत्र में कहा गया है कि शिव के मंदिर में भल्लक, सूर्य के मंदिर शंख और दुर्गा के मंदिर में बांसुरी तथा माधुरी नहीं बजाने चाहिये। जय सिंह कल्प द्रुम के अनुसार पूजा के समय सदैव घंटा या घंटी बजाना शुभ है। घंटा सर्ववाद्दमय माना गया है। भारत के अलावा चीनियों ने भी इसे समझा और आज बाजार में तरह-तरह कि विंड चाइम्स उपलब्ध है, यही नहीं गिरजाघरों में भी घंटी बजाने की परम्परा है। घंटे की आवाज निगेटिव एनर्जी को हटा कर पॉजिटिव एनर्जी को एकत्र करके स्थान के वास्तु को शुद्ध करती है।

इसलिये पूजा घर में अपने वामभाग में घंटा बजा कर रखना चाहिये और उसकी गंध, अक्षत, पुष्प से पूजा करनी चाहिये।

मन्त्र है – ‘ॐ भूर्भुव: स्व: गरुड़ाय नम:’।

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