व्हेल की उल्टी को क्यों कहते हैं तैरता हुआ सोना?

व्हेल की उल्टी को क्यों कहते हैं तैरता हुआ सोना? 2 करोड़ रुपए किलो होती है कीमत, साइंस भी नहीं सुलझा सका इस पहेली को

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मोहित नागर
मोहित नागर
मोहित नागर एक कंटेंट राइटर है जो देश- विदेश, पॉलिटिक्स, एंटरटेनमेंट, हेल्थ और वास्तु से जुड़ी खबरों पर लिखना पसंद करते हैं। उन्होंने डॉ० भीमराव अम्बेडकर कॉलेज (दिल्ली यूनिवर्सिटी) से अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। मोहित को लगभग 3 वर्ष का समाचार वेब पोर्टल एवं पब्लिक रिलेशन संस्थाओं के साथ काम करने का अनुभव है।

5 सितंबर को लखनऊ में उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स यानी STF ने एक रेड के दौरान 4 किलो व्हेल की उल्टी बरामद की थी। व्हेल की इस उल्टी की कीमत करीब 10 करोड़ रुपए है। पिछले 15 महीनों में पुलिस ने देश की अलग-अलग जगहों से करीब 30 किलो व्हेल की उल्टी बरामद की है।

आप भी सोच रहें होंगे कि व्हेल की उल्टी क्या होती है? यह कैसे बनती है? इसकी कीमत इतनी अधिक क्यों है?

व्हेल की उल्टी क्या होती है और ये कैसे बनती है?

व्हेल की उल्टी को एम्बरग्रीस भी कहा जाता है। ये एक फ्रेंच शब्द एम्बर और ग्रीस से मिलकर बना है। जोकि एक कठोर मोम के जैसा पदार्थ होता है। जिसका निर्माण स्पर्म व्हेल के पाचन तंत्र में मौजूद आंतों में होता है।

एम्बरग्रीस या व्हेल की उल्टी अक्सर समुद्र में तैरते हुए पाया जाता है। कभी-कभी यह समुद्र तटों पर लहरों के साथ बहकर भी आ जाता है। यह मरी हुई व्हेल के पेट में भी पाया जा सकता है। इसे फ्लोटिंग गोल्ड और समुद्र का खजाना भी कहा जाताा है। व्हेल की उल्टी अफ्रीका, चीन, जापान और अमेरिका के समुद्र तटों और बहामास आइलैंड्स आदि जगहों पर सबसे ज्यादा पाया जाता है।

व्हेल के शरीर से जब व्हेल की उल्टी निकलती है, तो इसका रंग हल्का पीला होता है। कुछ समय बाद इसका रंग गहरा लाल हो जाता है। इसका रंग काला और सलेटी भी हो सकता है। जब यह ताजा होती है, तो इसमें से मल जैसी गंध आती है, लेकिन कुछ समय बाद इससे मीठी और मिट्टी जैसी सुगंध आने लगती है।

व्हेल की उल्टी कैसे बनती है, इस बारें में कुछ कहा नहीं जा सकता है। ये सबसे अजीबोगरीब घटनाओं में से एक है। साइंस भी इइस पहेली को सुलझा नहीं पाया है। क्रिस्टोफर केंप, जो फ्लोटिंग गोल्ड: अ नैचुरल एंड (अननैचुरल) हिस्ट्री ऑफ एम्बरग्रीस नामक किताब के लेखक है, उनका कहना है कि इसे व्हेल की उल्टी कहना सही नहीं है। कभी-कभी, मांस का टुकड़ा व्हेल के पेट से उसकी आंतों में पहुंचता है, तो एक जटिल प्रोसेस से व्हेल की उल्टी बनती है। जिसे व्हेल बाहर निकाल देती है। 1783 में जर्मन फिजिशियन फ्रांज श्वेइगर ने व्हेल की उल्टी को ‘कठोर व्हेल का गोबर’ कहा था।

कितनी होती है इसकी कीमत

व्हेल की उल्टी की कीमत की अगर बात की जाएं तो इसकी इंटरनेशल मार्केट में कीमत 2 करोड़ रुपए प्रति किलो है। पिछले साल मुंबई पुलिस ने 1 किलो व्हेल की उल्टी की कीमत 1 करोड़ रुपए बताई थी। वहीं UP STF ने लखनऊ में बरामद 4.12 किलो व्हेल की उल्टी की कीमत 10 करोड़ रुपए बताई है।

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