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गरीब घरों के लड़के आईपीएल में कर रहे हैं कमाल, किसी के पिता का है फलों का ठेला, तो किसी के पिता करते हैं गैस सिलिंडर की डिलीवरी।

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कहते हैं जिसका कोई नहीं होता उसका खुदा होता है यारो, इंसान के अंदर जज्बा हो तो वो क्या कुछ नहीं कर सकता है फिर चाहे जितनी बाधायें उसके मार्ग में आएं लेकिन अगर पूरी सिद्दत से कुछ करना चाहो तो फिर पूरी कायनात तुम्हारे कदमों में झुक सकती है। ऐसी ही जज्बे की मिसालें पेश की जा रही हैं इस साल के आईपीएल में।

चमक धमक और पैसे से भरपूर दुनिया की सबसे महंगी लीग आईपीएल का हिस्सा भला कौन नहीं बनना चाहता, देश विदेश से हजारों की तादाद में खिलाड़ी अपना नाम नीलामी में भेजते है ताकि कोई उन्हें खरीद ले और वो भी अपने हुनर का जलवा दिखा सकें। लेकिन कुछ खिलाड़ियों के लिए आईपीएल की नीलामी संजीवनी का काम करती है, उनके लिए आईपीएल वो वरदान है जो एक झटके में उनको मुफलिसी के दौर से बाहर निकालने में मील का पत्थर साबित होता है।

आईपीएल 2022 भी कुछ ऐसी ही कहानियां गढ़ रहा है। वैसे तो कई खिलाड़ी हैं जिनकी कहानी एक जैसी है लेकिन दो खिलाड़ी हैं जिनके “संघर्ष से सफलता” के सफर की कहानी उन सबके लिए मिसाल बन गयी हैं जिनके पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं फिर भी अपने सपने को पूरा करने के लिए जीतोड़ मेहनत करने में डटे हैं। इन दो खिलाड़ियों ने अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर सभी क्रिकेट प्रेमियों के दिल जीत लिए हैं।

तो आइये बताते हैं इनकी कहानी, जिसको जानकर आपके अंदर की निराशा आशा में बदल जाएगी –

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उमरान मलिक ( Umran Malik ) –

जम्मू कश्मीर जैसे पहाड़ी और सीमित संसाधन वाले राज्य से निकल कर आईपीएल में अपनी रफ़्तार से सबका दिल जीत लेने वाले इस स्पीडस्टार की चर्चाएं पिछले सत्र से ही होने लगी थीं, इसीलिए सनराइज़र्स हैदराबाद ने उमरान को रिटेन करने का फैसला किया था, हालाँकि ये फैसला सबको चौंकाने वाला था लेकिन हैदराबाद मैनेजमेंट ने उमरान की काबिलियत और हुनर को अच्छे से समझ लिया था, मैनेजमेंट के भरोसे पर खरा उतरते हुए उमरान अब तक 9 मैच में 15 विकेट चटका चुके हैं तो वहीँ उनकी आग उगलती गेंदों ने शोएब अख्तर और ब्रेट ली जैसे गेंदबाजों की याद दिला दी है, अब तक 154 किलोमीटर प्रति घंटा तक की गेंद फेंक चुके उमरान इस आईपीएल सत्र के सबसे तेज गेंदबाज बनकर उभरे हैं। रफ़्तार की इस सौदागरी और सटीक यॉर्कर के चलते उनको जल्दी ही भारत की टीम में जगह मिल सकती है।

बड़ा दिलचस्प रहा है उमरान का आईपीएल तक का सफर

उमरान बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं उनके पिता फल बेच कर घर चलाते थे, उमरान जिनका क्रिकेटर बनने का कोई सपना नहीं था टेनिस बॉल से क्रिकेट खेला करते थे, क्रिकेटर बनने का सपना उमरान के बेस्ट फ्रेंड अब्दुल समद का था जो अब उमरान के साथ ही सनराइज़र्स हैदराबाद की टीम का हिस्सा हैं और जम्मू कश्मीर के लिए साथ ही प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेलते हैं। टेनिस बॉल से उमरान की गति से प्रभावित समद उनकी गेंदबाजी की वीडियो अपने फ़ोन में रिकॉर्ड करने लगे, अब्दुल जो खुद क्रिकेट में तरक्की की राह पर अग्रसर हैं जहा भी पहुंचे अपने कोच और सेलेक्टर्स को उमरान की गेंदबाज़ी की वीडियो दिखाने लगे, तभी जम्मू क्रिकेट बोर्ड ने इरफ़ान पठान को जम्मू कश्मीर की टीम का मेंटर नियुक्त कर दिया, समद ने बात इरफ़ान तक पहुंचाई तो उमरान को ट्रायल के लिए बुलाया गया। मलिक की गति देखते ही इरफ़ान ने उनके हुनर को पहचान लिया और उनको तराशने की शुरुआत कर दी जिसके चलते मलिक को जल्द ही प्रथम श्रेणी में खेलने को मिल गया।

समद ने ही सनराइज़र्स हैदराबाद के मैनेजमेंट को मनाया –

आईपीएल की नीलामी में हैदराबाद की टीम ने समद को खरीदा, उसके बाद हैदराबाद को नेट बॉलर्स की आवश्यकता थी तो समद ने एक बार फिर उमरान का नाम सुझा दिया, उमरान हैदराबाद के नेट बॉलर बने और उन्होंने अपनी गेंबाजी से सबको इतना प्रभावित किया कि हैदराबाद ने उमरान को अपनी टीम में शामिल कर लिया और उसके बाद उमरान ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा और देखते ही देखते खुद को भारतीय टीम में हिस्सेदारी का दावेदार बना लिया।

उमरान के पिता ने अपने काम को लेकर कही दिलचस्प बात –

एक पत्रकार महोदय ने उमरान के पिता से पूछा की लड़का स्टार भी बन गया और करोड़पति भी, अब फल बेचना बंद कर देंगे ? जबाब आया मरते दम तक भी नहीं, उमरान के पिता कहना है की बेटा आज जो भी है इस फल की दुकान की कमाई की वजह से ही है तो ऐसा कैसे हो सकता है की में रोटी रोजी का वही साधन बंद कर दूँ।

दूसरा खिलाड़ी जिसने इस आईपीएल में सुर्खियां बटोरी हैं उसका नाम है रिंकू सिंह –

रिंकू सिंह (Rinku Singh)

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के रहने वाले रिंकू सिंह के पिता गैस सिलिंडर की होम डिलीवरी करके अपने परिवार के लिए दो जून की रोटी का जुगाड़ किया करते हैं। परिवार के हालत इतने नाजुक थे की एक समय रिंकू के परिवार पर करीब 5 लाख रूपए का कर्ज़ा भी हो गया था जिसके चलते रिंकू के क्रिकेट छोड़ने की नौबत आ गयी थी, एक परिचित की मदद से उन्हें स्वीपर की नौकरी भी मिल गयी थी लेकिन वक़्त को कुछ और गवारा था, रिंकू का मन बदला और उन्होंने क्रिकेट को ही आजीविका बनाने की सोची। अंडर – 16 खेलकर जो पैसा मिलता उससे परिवार की थोड़ी मदद करते लेकिन उन्होंने जल्दी ही अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा लिया जिसके चलते उत्तर प्रदेश की रणजी टीम में रिंकू को मौका मिला और उसके बाद कोलकाता नाइटराइडर्स में। सुपरस्टार्स से भरी केकेआर में उनको खेलने का उतना मौका नहीं मिला लेकिन इस सीजन सभी मुख्य बल्लेबाजों की ख़राब फॉर्म के कारण रिंकू को मौका मिला जिसको रिंकू ने दोनों हाथों से भुनाया।

सफर में मिले दिलचस्प साथी

आर्थिक तंगी से मजबूर रिंकू क्रिकेट किट भी खरीदने की स्थिति में नहीं थे ऐसे में मोहम्मद जीशान ने उनकी क्रिकेट किट खरीदने में उनकी मदद की, तो मसूद अमीन ने उनको फ्री कोचिंग दी तो वहीँ शाहरुख़ खान के स्वामित्व वाली कोलकाता नाइट राइडर्स ने उनको आईपीएल में ब्रेक दिया। ये सफर अपने आप में हिन्दू मुस्लिम भाईचारे की अनोखी मिसाल कायम करता है।

नीलामी के पैसे के पिता को गिफ्ट की बाइक –

रिंकू कहते हैं की जब उनका नाम नीलामी में बोला गया तो उनको लगा की बेस प्राइस पर ही ख़रीदा जाऊंगा लेकिन टीमों ने दिलचस्पी दिखाई तो कीमत 80 लाख पर जाकर रुकी, इतना पैसा उनके परिवार में पहले किसी ने नहीं देखा था और जब वो पैसा हाथ आया तो रिंकू ने अपने पिता को एक बाइक खरीद कर दी ताकि वो अपना काम थोड़ी सुलभता से कर सकें।

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