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कीटनाशक दवाओं के नाम और प्रयोग, इसकी मात्रा और इस्तेमाल से जुड़ी बातें जो आपको जाननी है बेहद जरूरी!

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कीटनाशक दवाओं के नाम और प्रयोग कीटनाशक रासायनिक या जैविक पदार्थों का ऐसा मिश्रण होता है जिसका इस्तेमाल पौधों के जीवन पर कीड़े मकोड़ों के प्रभाव को कम करने, मारने या बचाने के लिए किया जाता है। इसका प्रयोग कृषि के क्षेत्र में पेड़ पौधों को बचाने के लिए बहुतायत से किया जाता है। कीटनाशकों में शाकनाशी भी शामिल होती है जिनका उपयोग अवांछित वनस्पति और खरपतवार को नष्ट करने के लिए किया जाता है। विभिन्न कीड़ों को नियंत्रित करने के लिए कीटनाशकों का उपयोग किया जाता है। जबकि, फफूंदी और मोल्डों के विकास को रोकने के लिए कवकनाशकों का उपयोग किया जाता है। कीटनाशकों को उनके गुणों, रासायनिक और कार्बनिक संरचना के आधार पर कई समूहों में वर्गीकृत किया जा सकता है। आज इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको कीटनाशक दवाओं के नाम और प्रयोग से लेकर इसको इस्तेमाल में लेने से पहले जो बाते आपको जाननी चाहिए उस पर बात करेंगे। साथ ही हम आर्टिकल में जानेंगे की कौन सी दवा का उपयोग कब और कैसे करना होता है और इसे किस तरह के दुष्प्रभाव हो सकते हैं।

कीटनाशक दवाओं के नाम और प्रयोग

कीटनाशक दवाओं का प्रयोग

कीटनाशक दवाओं का प्रयोग पौधों में कीड़े मकोड़ों से होने वाले दुष्प्रभावों को कम करने, उन्हें मारने या उनसे बचाने के लिए किया जाता है। इसका प्रयोग कृषि के क्षेत्र में पेड़ पौधों को बचाने के लिए भी किया जाता है। अगर यह प्रयोग सही तरीके से नहीं किया गया तो इसका कोई फायदा नहीं मिलता या फिर नुक्सान भी हो सकता है। कुछ कीटनाशक दवाओं का प्रयोग बुवाई के समय ही करते है, तो कुछ दवाओं का प्रयोग जब फसल थोड़ी बड़ी हो जाती है, तब करते है। हमें जब भी कीटनाशक दवाई चाहिए हो तो, हमें इससे पहले परामर्श लेकर ही उसका प्रयोग करना चाहिए।

इसके अलावा कुछ दवाओं पर प्रयोग का तरीका लिखा होता है, कि उसका प्रयोग अर्थात छिडकाव कैसे करते है। यदि आप किसान है और आपको समझ में नहीं आ रहा है कि फसल में कौन सा रोग है या कौन से कीड़ें लगे हुए है। इस विषय में जानकारी या सहायता के लिए कृषि सहायता नम्बर (Krishi Helpline Number)” पर भी कॉल करके सम्पर्क कर सकते है। इसमें आपकी समस्याओं फसल में लगने वाले रोगों – कीटों की समस्याओं निवारण बताया जाता है |

कीटनाशक दवाओं के नाम

  1. प्रोपेनफास + साइपरमेथ्रिन 44 ई.सी.
    व्यापारिक नाम:- पॉलीट्रिन सी. 44, राकेट 44
  2. मिथाइल डिमेटान 25 ई.सी.
    व्यापारिक नाम:- मेटासिस्टॉक्स 25 ई.सी., पैरासिस्टॉक्स 25 ई.सी.
  3. डाइमिथोएट 30 ई.सी.
    व्यापारिक नाम:- रोगर 30 ई.सी., नोवागेर 30 ई.सी.
  4. डाइक्लोरवास 76 ई.सी.
    व्यापारिक नाम:- नुवान 76 ई.सी., वेपोना 76 ई.सी.
  5. डायकोफाल 13.5 ई.सी.
    व्यापारिक नाम:- डायकोफास 13.5 ई.सी.
  6. मेलाथियान 50 ई.सी.
    व्यापारिक नाम:- मेलाटाफ 50 ई.सी., कोरोथियान 50 ई.सी.
  7. क्लोरपायरीफास 20 ई.सी.
    व्यापारिक नाम:- डर्सवान 20 ई.सी. राडार
  8. कार्बोफ्यूरान 3 जी.
    व्यापारिक नाम:- फ्यूराडान 3 जी., डायफ्यूरान 3 जी.
  9. फोरेट 10 जी.
    व्यापारिक नाम:- थिमेट 10 जी., पेरीटाक्स 10 जी
  10. कार्टाप हाइड्रोक्लोराइट 4 जी.50% एस.पी.
    व्यापारिक नाम:- पडान, केलडान
  11. इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस.एल.
    व्यापारिक नाम:- कान्फीडोर
  12. कार्बारिल 50% घुलनषील चूर्ण
    व्यापारिक नाम:- सेविन, धानुबिन
  13. मिथाइल पैराथियान 50 ई.सी.2% चूर्ण
    व्यापारिक नाम:- मेटासिड, फालीडाल
  14. परोनिल 5 एस.सी. 0.3% जी
    व्यापारिक नाम:-रीजेन्ट
  15. कोरेजन 18.5 एस.सी.
    व्यापारिक नाम:- रायनेक्सीपायर
  16. क्लोरेन ट्रेनीलीप्रोल (0.4 ग्रेन्यूल)
    व्यापारिक नाम:- फरटेरा

भारत में प्रतिबंधित कीटनाशक दवाएं

कीटनाशक दवाओं का इस्तेमाल करने के लिए रासायनिक या जैविक पदार्थों का ऐसा मिश्रण होता है जिसे किसान अपनी फसलों को सुरक्षित रखने के लिए तैयार करते हैं, ताकि कीड़ों से फसलों को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके और उनके द्वारा होने वाले दुष्प्रभावों से बचाया जा सके। पूरा हो गया है। इसका उपयोग ज्यादातर कृषि क्षेत्रों में पेड़ों और पौधों को कीटों से बचाने के लिए किया जाता है।

वहीं आपको जानकारी के लिए बता दें भारत समेत कई देशों ने कीटनाशक दवाओं को कई सालो पहले ही बैन कर दिया है। किन्तु भारत में अभी भी इसका इस्तेमाल बिना पाबन्दी के हो रहा है। इससे फसल, किसानों, मिट्टी, मित्र जीवाणु और मनुष्यों पर घातक परिणाम देखने को मिलते है। इन कीटनाशकों का इतना बड़ा दुष्प्रभाव है कि इससे गर्भवती महिलाओ को जान का खतरा तक हो सकता है, तथा पैदा हुए बच्चो में अपंगता आ सकती है।

इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसी ही कीटनाशक दवाओं और उनके रासायनिक नामों के बारे में बताएंगे, जो दवा नहीं, ज़हर है जिन्हे भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित भी कर दिया गया है,किन्तु यह कीटनाशक, रासायनिक दवाइयाँ तेजी से बिक रही है, जिसकी जानकारी हमारे भोले-भाले किसान भाइयो को भी नहीं है। यहाँ आपको ऐसी ही कुछ प्रतिबंधित कीटनाशक दवाइयों की सूची दी गयी है, जिनके रासायनिक और व्यापारिक नाम जानकर आप ऐसे ज़हर से अपनी प्रकृति और मानव जीवन की रक्षा कर सकते है।

प्रतिबंधित कीटनाशकों की सूची

कीटनाशक और वो फसल जिन्हें अनुमोदित सूची में से हटाया जाना है।

  • 2‚4- डाईक्लोरोफिनोक्सी एसिटिक एसिड
    फसल :- चाय
  • एनिलोफास
    फसल:- सोयाबीन
  • विटरटेनाल
    फसल:- सेब, चाय
  • कारब्राइल
    फसल:- अरहर
  • कारबोफ्यूरान
    फसल:- कपास, शिमला मिर्च
  • क्लोरोयेलोनिल
    फसल:- सेब, अंगूर, मिर्च
  • क्लोरोपाइरीफास
    फसल:- मूँग, सरसों, गन्ना
  • कॉपर आक्सीक्लोराइड
    फसल:- जीरा, चाय, धान
  • साइपरमेंथ्रीन
    फसल:- गन्ना
  • डेल्टामीथ्रीन (डेकामीथ्रीन)
    फसल:- चना
  • डाइक्लोरोवोस (डी.डी.वी.पी.)
    फसल:- गन्ना
  • डाइफिनकोजोल
    फसल:- मूँगफली
  • डाइफ्लूबिनजोरॉन
    फसल:- मूँगफली
  • डीमीथोट
    फसल:- अरहर, कपास, मूँगफली
  • डीनोकेप
    फसल:- सेब, अंगूर, बिन्स, भिण्डी, आड़ू, बेर, मटर, पोपी (अफीम), मिर्च, जीरा, मेथी
  • इण्डोसल्फान
    फसल:- ज्वार, मक्का
  • फिन्नीमाल
    फसल:- मिर्च, मटर
  • फ्लूसीलाजोल
    फसल:- अंगूर, सेब
  • मेलाथियान
    फसल:- कपास, मूँगफली, सरसों
  • मैंकोजेब
    फसल:- चुकन्दर (आलू), अदरक
  • मिथाइल पाराथीऑन
    फसल:-सोयाबीन, मूँगफली
  • मोनोक्रोटोफॉस
    फसल:- चना, एरण्ड, सरसों
  • ऑक्सीडेमेटोन,-मिथाइल
    फसल:- नींबू, संतरा आदि (खट्टे नींबू)
  • पर्मेथ्रिन
    फसल:- भिण्डी, फूलगोभी, नींबू, संतरा आदि
  • फेन्योएट
    फसल:- हरा चना, उड़द, कपास, इलायची
  • फासालोनी
    फसल:- धान, कपास, मूँगफली, इलायची, भिण्डी, मिर्च
  • फासफेमीडान
    फसल:- सरसों
  • प्रोफीनोफॉस
    फसल:- चाय
  • प्रोपीकॉनाजोल
    फसल:- केला, कॉफी
  • क्वानीलाफॉस
    फसल:- गन्ना, बैंगन, प्याज, आम, कॉफी, पत्ता गोभी
  • थायोफिनेट-मिथाइल
    फसल:- गेहूँ, ककड़ी समूह, अरहर
  • ट्राईडीमीफान
    फसल:-काफी, आम, मिर्च, सोयाबीन
  • ट्राइजोफॉस
    फसल:- बैंगन
  • ट्राइडीमार्फ
    फसल:- हरी मटर, ग्वार फली, ककड़ी समूह, बेर, चाय, नींबू, संतरा आदि
  • ट्राईफ्लूरेलिन
    फसल:- कपास, सोयाबीन
  • एरियोफ्यूजिन
    फसल:- धान, अंगूर, जीरा, सेब, आलू
  • कॉपर सल्फेट
    फसल:- आलू, अंगूर, टमाटर, मिर्च
  • स्ट्रेप्टोमाइसिन + टेट्रासाइक्लिन
    फसल:- मिर्च, कपास
  • कॉपर हाइड्रोआक्साइड
    फसल:- चाय, मिर्च, मूँगफली
  • फ्ल्यूफिनाक्स्यूरॉन
    फसल:- पत्ता गोभी
  • आक्सीकर्बाक्सिन
    फसल:- कॉफी
  • थायोबिनकार्ब (बेन्थियोकार्बा)
    फसल:- चावल

खरपतवार नाशक दवाइयों के नाम और इस्तेमाल

खरपतवारों की उपस्थिति फसल की उपज को कम करने में सहायक है। किसान जो अपनी पूर्ण शक्ति व साधन फसल की अधिकतम उपज प्राप्त करने के लिए लगाता है। ये अनैच्छिक पौधे इस उद्देश्य को पूरा नहीं होने देते। खरपतवार फसल के पोषक, तत्व, नमी, प्रकाश, स्थान आदि के लिए प्रतिस्पर्धा करके फसल की वृद्धि, उपज एवं गुणों में कमी कर देते है।

खरपतवारों से होने वाली हानि किसी अन्य कारणों से जैसे कीड़े, मकोड़े, रोग, व्याधि आदि से हुई हानि की अपेक्षा अधिक होती है। एक अनुमान के आधार पर हमारे देश में विभिन्न व्याधियों से प्रतिवर्ष लगभग 1 लाख 40 हजार करोड़ रूपये की हानि होती है जिसका लगभग एक तिहाई से ज्यादा खरपतवारों द्वारा होता है।

यदि आप अपने खेत में अच्छी फसल चाहते है, तो आपको खरपतवार नियंत्रण पर भी ध्यान देना होता है। धान की फसल में खरपतवार की रोकथाम के लिए यांत्रिक विधि हाथ से निराई-गुड़ाई आदि को काफी प्रभावी माना जाता है, किन्तु कई कारणों के चलते इस विधि का व्यापक प्रचलन नहीं हो पा रहा है। धान की फसल में पौधो और मुख्य खरपतवार जैसे जंगली धान एवं संवा के पौधों में पुष्पावस्था के पहले काफी समानता होने के चलते किसानो को निलाई-गुड़ाई के समय आसानी से इन्हे पहचानने में काफी समस्या होती है।

वर्तमान समय में मजदूरी के दाम अधिक होने के कारण इस विधि को इस्तेमाल आर्थिक रूप से लाभदायक नहीं है। इसके अतिरिक्त खरीफ के मौसम में कभी-कभी अधिक नमी होने के कारण यांत्रिक विधि द्वारा निलाई-गुड़ाई नहीं हो पाती है। वही कीटनाशकों द्वारा इन खरपतवार पर नियंत्रण करना प्रति हेक्टयेर के हिसाब से काफी कम लागत आती है, तथा समय भी कम लगता है। रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल करते दवाईयों की उचित मात्रा, उचित ढंग तथा उपयुक्त समय का विशेष ध्यान रखता होता है, यदि ऐसा न किया जाये पौधों को लाभ की जगह हानि उठानी पड़ सकती है |

खरपतवारनाशी रसायन, उसकी मात्रा (ग्राम), प्रयोग का समय और खरपतवार नियंत्रित

  1. ब्यूटाक्लोर (मिचेटी)
    मात्रा:- 1500-2000
    समय:-बुवाई/रोपाई के 3-4 दिन बाद
    नियंत्रित:- घास कुल के खरपतवार
  2. एनीलोफास (एनीलोगार्ड)
    मात्रा:- 400-500
    समय:- सदैव
    नियंत्रित:- घास एवं मोथा कुल के खरपतवार
  3. बैन्थियोकार्ब (सैटनी)
    मात्रा:- 1000-1500
    समय:- सदैव
    नियंत्रित:- घास कुल के खरपतवार
  4. पेंडीमेथलिन (स्टाम्प)
    मात्रा:- 1000-1500
    समय:- सदैव
    नियंत्रित:- घास, मोथा एवं चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार
  5. आक्साडायजान (रोनस्टार)
    मात्रा:- 750-1000
    समय:- सदैव
    नियंत्रित:- सदैव
  6. आक्सीफलोरफेन (गोल)
    मात्रा:- 150-250
    समय:- सदैव
    नियंत्रित:- सदैव
  7. प्रेटिलाक्लोर (रिफिट)
    मात्रा:- 750-1000
    समय:- सदैव
    नियंत्रित:- सदैव
  8. 2, 4-डी (नाकवीड)
    मात्रा:- 500-1000
    समय, नियंत्रित:- चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार पर नियंत्रण के लिए रासायनिक
  9. क्लोरिभ्युरान + मेटसल्फयूरान (ऑलमिक्स)
    मात्रा:- 4
    समय, नियंत्रित:- चौड़ी पत्ती वाले एवं मोथा कुल खरपतवार पर नियंत्रण के लिए 20-25 दिन बाद
  10. फेनाक्जाप्राप इथाईल (व्हिपसुपर)
    समय:- 60-70
    समय, नियंत्रित:- सकरी पत्ती वाले खरपतवार पर नियंत्रण के लिए बुवाई/रोपाई के 20-25 दिन बाद प्रभावशाली

हमने आपको इस लेख के माध्यम से बताया की कीटनाशक दवाओं के नाम और प्रयोग कैसे करते हैं । हम आशा करते हैं आपको हमारा लेख बहुत पसंद आया होगा, कृपया इस पोस्ट को अपने दोस्तों से साझा करे और कमेंट बॉक्स में सुझाब जरूर दे।

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