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मुख्तार अब्बास नकवी ने ‘तालिबानी मानसिकता’ की कड़ी निंदा की, ऐसे लोगों को कहा ‘पेशेवर प्रदर्शनकारी’

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शनिवार को मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने “तालिबानी मानसिकता” पर हमला किया है , उनका मानना है कि तालिबानी मानसिकता ने महिलाओं की स्वतंत्रता, गरिमा और सशक्तिकरण में बाधाएं पैदा कीं है। उस मानसिकता वाले लोगों ने तत्काल तीन तलाक की प्रथा को दंडनीय अपराध बनाने का विरोध किया था। आपको बता दें कि मुख्तार अब्बास नकवी केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री है।

अल्पसंख्यक दिवस के मौके पर एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नकवी ने कहा कि जो लोग तत्काल तीन तलाक की सामाजिक बुराई को अपराध बनाने का विरोध करते हैं या हज के लिए अकेले यात्रा करने वाली मुस्लिम महिलाओं पर लगे प्रतिबंध को हटाने पर सवाल खडे करते हैं, ऐसे लोग ‘पेशेवर प्रदर्शनकारी’ हैं।

उनके कार्यालय के द्वारा जारी किये गए एक बयान के अनुसार, राज्यसभा के उपनेता ने उन लोगों पर भी निशाना साधा जो महिलाओं के लिए शादी की कानूनी उम्र के संबंध में संवैधानिक समानता पर आपत्ति जता रहे थे। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को महिलाओं की कानूनी शादी की उम्र 18 साल से बढ़ाकर 21 साल करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।

नकवी ने कहा कि एक तरफ जहां दुनिया के लगभग सभी धर्मों के मानने वाले भारत में रहते हैं। दूसरी ओर, देश में बड़ी संख्या में नास्तिक भी समान संवैधानिक और सामाजिक अधिकारों के साथ मौजूद हैं।

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उन्होंने कहा कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछले सात वर्षों के दौरान ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ की प्रतिबद्धता के साथ काम किया है, जिसने महत्वपूर्ण सुधार और समाज के सभी वर्गों अल्पसंख्यक का भी समावेशी के साथ विकास किया है।

मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार ने ‘हुनर हाट’ के माध्यम से देश के कोने-कोने के स्वदेशी कारीगरों और शिल्पकारों को एक विश्वसनीय मंच प्रदान किया है। पिछले छह वर्षों के दौरान सात लाख से अधिक कारीगरों, शिल्पकारों और उनसे जुड़े लोगों को रोजगार और रोजगार के अवसर प्रदान किए गए हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान सरकार ने छह अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों – पारसी, जैन, बौद्ध, सिख, ईसाई और मुस्लिमों के लगभग पांच करोड़ छात्रों को छात्रवृत्ति दी है। लगभग 50 प्रतिशत लाभार्थी छात्राएं हैं। इसके परिणामस्वरूप अल्पसंख्यकों, विशेषकर मुस्लिम लड़कियों के बीच स्कूल छोड़ने की दर में उल्लेखनीय गिरावट आई है।

मुस्लिम लड़कियों में स्कूल छोड़ने की दर जो 2014 से पहले 70 प्रतिशत से अधिक थी, अब घटकर लगभग 30 प्रतिशत रह गई है। हमारा लक्ष्य आने वाले दिनों में इसे जीरो प्रतिशत बनाना है।

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