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शनि-पुष्य योग में यह खास उपाय करने से शनिदेव होते है प्रसन्न, जानिए कब है शुभ तिथि ?

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मोहित नागर
मोहित नागर
मोहित नागर एक कंटेंट राइटर है जो देश- विदेश, पॉलिटिक्स, एंटरटेनमेंट, हेल्थ और वास्तु से जुड़ी खबरों पर लिखना पसंद करते हैं। उन्होंने डॉ० भीमराव अम्बेडकर कॉलेज (दिल्ली यूनिवर्सिटी) से अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। मोहित को लगभग 3 वर्ष का समाचार वेब पोर्टल एवं पब्लिक रिलेशन संस्थाओं के साथ काम करने का अनुभव है।

ऐसा माना जाता है कि जिस व्यक्ति पर भगवान शनिदेव की कृपा होती है उस व्यक्ति को कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखना पड़ता और शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए शनिवार को सबसे अच्छा दिन माना जाता है क्योंकि यह शनिदेव को समर्पित दिन होता है।

यही कारण है कि जिन लोगों की राशि में शनिदेव की खराब स्थिति चल रही होती है उन्हें शनिवार के दिन ही उपाय किए जाने की सलाह दी जाती है। लेकिन क्या आप जानते है कि 4 जून को आने वाला शनिवार बहुत ही ज्यादा खास होने वाला है।

क्योंकि इस दिन शनि की चाल बदलने वाली है और इस दिन पुष्य नक्षत्र होने के कारण शनि-पुष्य का शुभ योग बन रहा है। इसके अलावा इस दिन रवियोग भी बन रहा है और खास बात यह है कि यह संयोग शनिवार को ही पड़ रहा है।

अगर बात करें पुष्य नक्षत्र की तो यह 3 जून की शाम को 7 बजे से शुरू होकर 4 जून शनिवार की रात 10 बजे तक रहेगा और इस संयोग में अगर कुछ खास उपाय किए जाए तो यह आपके दिन भी बदल सकता है।

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पुष्य नक्षत्र में करें यह खास उपाय ?

हनुमान चालीसा या हनुमान अष्टक का करें पाठ

ऐसा कहा जाता है कि अगर किसी व्यक्ति की कुडली में शनि ग्रह बाधाएं पैदा कर रहा हो तो ऐसे व्यक्ति को शनिवार के दिन हनुमान चालीसा या हनुमान अष्टक का पाठ करना चाहिए। ऐसा करने शनि ग्रह से होने वाली पीड़ा से मुक्ति मिल जाती है।

काले घोड़े की नाल से बनी अंगूठी करें धारण

इस खास संयोग के दिन अगर कोई व्यक्ति काले घोड़े की नाल से अंगूठी बनवाकर अपनी मध्यमा उंगली में पहनता है तो उसके सभी रूके हुए काम बनने लगते है। इसके अलावा अगर नाल की अंगूठी ना मिल पाए तो आप किसी ज्योतिष से सलाह लेकर नीलम रत्न को भी धारण कर सकते है।

पीपल के पेड़ की करें परिक्रमा

इस खास संयोग के समय अगर पीपल के पेड़ की परिक्रमा की जाती है तो इससे शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है। लेकिन इस दौरान आप इस चीज का खास ख्याल रखें कि आपको परिक्रमा के दौरान ऊं शं शनैश्चराय नमः मंत्र का पाठ करना चाहिए। साथ ही पीपल के पेड़ की जड़ों में मीठा दूध अर्पित करना चाहिए और शनि स्तवराज का पाठ करना चाहिए।

इन मंत्रों का करें जाप ?

जब आप पीपल के पेड़ की परिक्रमा और पूजा कर लें तो इसके उपरांत आपको ऊं प्रां प्रौं सः शनये नमः, ऊं शन्नो देवीरभिष्टडआपो भवन्तुपीतये या फिर ऊं शं शनैश्चाराय नमः का जाप करना चाहिए। ऐसा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है।

दान करें

इसके अलावा आप शनिदेव को तेल अर्पित कर सकते है और साथ ही जूते-चप्पल, कंबल, तेल आदि का दान भी कर सकते है।

लाल चंदन की माला करें धारण

अगर आप शनिदेव के प्रकोप से काफी ज्यादा परेशान रहते हो तो आपको शनि पुष्य योग के वक्त लाल चंदन की माला से ऊं शं शनैश्चराय नमः मंत्र का जाप करके उस माला को धारण कर लेना चाहिए। ऐसा करने से शनिदेव के प्रकोप का असर धीमा हो जाता है।

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