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White Bread या Brown Bread कौन सी है हेल्दी, जानें दोनों के फायदे और नुक्सान!

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मोहित नागर
मोहित नागर
मोहित नागर एक कंटेंट राइटर है जो देश- विदेश, पॉलिटिक्स, एंटरटेनमेंट, हेल्थ और वास्तु से जुड़ी खबरों पर लिखना पसंद करते हैं। उन्होंने डॉ० भीमराव अम्बेडकर कॉलेज (दिल्ली यूनिवर्सिटी) से अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। मोहित को लगभग 3 वर्ष का समाचार वेब पोर्टल एवं पब्लिक रिलेशन संस्थाओं के साथ काम करने का अनुभव है।

नई दिल्ली: आप में से बहुत से लोग अपने स्वास्थ्य को लेकर हमेशा ही सचेत रहते होंगे और कुछ भी खाने से पहले सोचते होंगे इस चीज का सेवन करने से हमारा क्या लाभ व क्या हानी। आज कल आपने बहुत से लोगों को व्हाइट ब्रेड को रिजेक्ट करके ब्राउन ब्रेड का चुनाव करते हुए देखा होगा। आज हम आपको इस आर्टिकल में बताएंगे कि आखिर क्यों व्हाइट ब्रेड न खाकर लोग ब्राउन ब्रेड का चुनाव कर रहे हैं। दरअसल व्हाइट ब्रेड में घातक रीजेंट पोटेशियम ब्रोमेट और पोटेशियम आयोडाईड डाला जाता है जो नुकसानदायक होता है।

सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायर्नमेंट (CSE) के हाल ही में एक रिपोर्ट के अनुसार, सभी तरह की ब्रेड (वाइट, ब्राउन, मल्टीग्रेन्स, होल वीट, पाव, बन्स और पिज्जा बेस) में कार्सिनोजन्स केमिकल्स होते हैं, जो कैंसर और थाइरॉयड रोगों का कारण बनते हैं।

हमारे यहां बिकने वाली तमाम ब्रेड के 84 % नमूनों में पोटेशियम ब्रोमेट व पोटेशियम आयोडेट पाया जाता है। इन ऑक्सिडाइजिंग एजेंट्स पर कई देशों में प्रतिबंध लगा है। इनका उपयोग ब्रेड को फुलाने, मुलायम बनाने और अच्छी फिनिशिंग देने के लिए किया जाता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, सफेद ब्रेड को बनाते समय गेंहू से चोकर और बीज को हटा दिया जाता है और पोटेशियम, ब्रोमेट, बैंजोल पैराऑक्साइड और क्लोरी नडाई ऑक्साइड के साथ ब्लीच मिला दी जाती है। इसका हद से ज्यादा सेवन करने पर कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं ‌खड़ी हो सकती है। वही दूसरी तरफ यदि हम ब्राउन ब्रेड की बात करें तो इसे बनाते समय गेंहू मे से चोकर को नहीं हटाया जाता है। जिसकी वजह से ब्राउन ब्रेड में पोषक तत्व बचे रहते हैं।

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वाइट ब्रेड (White Bread)

  • यूरोपियन कांग्रेस ऑन ओबेसिटी में प्रस्तुत किए गए एक शोधपत्र के अनुसार रोज दो स्लाइस से अधिक वाइट ब्रेड खाने वालों में मोटापा बढ़ने की आशंका 40% तक बढ़ जाती है।
  • अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लीनिकल न्युट्रिशन की एक शोध के अनुसार वाइट ब्रेड अधिक खाने से टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। ब्रेड का शरीर पर असर इस पर निर्भर करता है कि हम कौन सी व कितनी ब्रेड खाते हैं।
  • व्हाइट ब्रेड में पोषण नहीं होता है लेकिन यह अन्य खाद्य पदार्थों में से भी पोषण का अवशोषण कम कर देता है। इसमें कुछ एंटी न्यूट्रिएंट्स भी होते हैं जो कैल्शियम, आयरन और जिंक के अवशोषण को रोकते हैं। कोई भी व्यक्ति जो वजन घटाना चाहता है उसे अपनी डाइट से ब्रेड को हटा देना चाहिए।
  • व्हाइट ब्रेड को खाने के बाद ब्लड शुगर लेवल और इंसुलिन तेजी से बढ़ता है। साथ यह तेजी से नीचे भी आता है‌ और इसकी वजह से हमें फिर से भूख लगती है और हम फिर खाते हैं। बार बार भोजन लेने के कारण हम मोटे होते चले जाते हैं।

ब्राउन ब्रेड (Brown Bread)

  • ब्राउन ब्रेड में वाइट ब्रेड की तुलना में ज्यादा पोषक तत्व होते हैं। ब्राउन ब्रेड में विटामिन बी-6, ई, मैग्नीशियम, फॉलिक एसिड, जिंक, कॉपर और मैंगनीज जैसे पोषक तत्व भी होते हैं।
  • सफेद ब्रेड में एडिटिव शुगर होती है जिसकी वजह से इसमें ब्राउन ब्रेड की तुलना में ज्यादा कैलोरी होती है।
  • ब्राउन में वाइट की तुलना में लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स होते हैं जिसकी वजह से यह स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होती है इससे शरीर में शुगर का लेवल कम रहता है। जिससे डायबिटीज और अन्य हृदय संबंधित बीमारी होने का खतरा कम हो जाता है।

सफेद ब्रेड और ब्राउन ब्रेड की तुलना की जाए तो ब्राउन ब्रेड थोड़ी ज्यादा हेल्दी होती है।

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